मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध अब एक और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। शनिवार को ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने ओमान के सलालाह बंदरगाह के पास अमेरिकी सेना के एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स जहाज को निशाना बनाया। ईरानी सैन्य कमान के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने सरकारी टेलीविजन पर इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि “आक्रामक अमेरिकी सेना” को रसद पहुँचाने वाले जहाज को समुद्र के बीचों-बीच ध्वस्त कर दिया गया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ओमान के पास का समुद्री क्षेत्र पहले से ही हाई-अलर्ट पर है।

जमीनी मोर्चे पर भी हालात बदतर होते जा रहे हैं। शनिवार रात ईरान के रिहायशी इलाकों— लोरेस्तान प्रांत के बोरुजेर्द और उत्तर-पश्चिमी शहर जंजन— पर अमेरिका और इजरायल के भीषण हवाई हमले हुए। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 12 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए हैं। राजधानी तेहरान भी धमाकों की गूंज से दहल उठी, जहाँ ‘ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ पर हुए हमले में इमारतों को भारी नुकसान पहुँचा है। 28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध में अब तक 1,200 से अधिक लोगों की जान जाने का अनुमान है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान “बेहतरीन ढंग से” आगे बढ़ रहा है। हालांकि, इसी दौरान सऊदी अरब स्थित ‘प्रिंस सुल्तान एयर बेस’ पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। इस हमले में 12 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। ट्रंप के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का यह विरोधाभास संकेत देता है कि यह युद्ध अब किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुका है।
