अर्जेंटीना से रवाना हुए डच क्रूज शिप ‘एमवी होंडियस’ (MV Hondius) पर हंतावायरस (Hantavirus) के संक्रमण ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गुरुवार को पुष्टि की है कि इस जहाज से जुड़े कुल 8 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 5 में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है और 3 संदिग्ध हैं। अब तक इस घातक वायरस के कारण 3 यात्रियों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद WHO ने 12 देशों को आधिकारिक तौर पर ‘अलर्ट’ जारी कर दिया है।

महामारी नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी
WHO प्रमुख ने मीडिया ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि हंतावायरस कोई नया वायरस नहीं है और इसे कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह कोरोना वायरस नहीं है और न ही छह साल पहले जैसी स्थिति है।” संगठन ने उन 12 देशों को अलर्ट भेजा है जिनके नागरिक सेंट हेलेना में जहाज से उतरे थे, जिनमें ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और नीदरलैंड जैसे देश शामिल हैं।
संक्रमण और मौत का सिलसिला
जहाज पर पहली मौत 11 अप्रैल को हुई थी, जिसे शुरुआत में सामान्य सांस की बीमारी समझा गया था। बाद में जोहानसबर्ग और स्विट्जरलैंड में भी संक्रमितों की मौत के बाद जांच में हंतावायरस की पुष्टि हुई। WHO के विशेषज्ञों की एक टीम वर्तमान में काबो वर्दे (Cabo Verde) में जहाज पर सवार होकर यात्रियों की मेडिकल जांच और जोखिम का आकलन कर रही है।
कैसे फैलता है हंतावायरस?
विशेषज्ञों के अनुसार, हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों के लार, पेशाब और मल के संपर्क में आने से फैलता है। WHO की डॉ. मारिया ने स्पष्ट किया कि अधिकांश हंतावायरस स्ट्रेन इंसानों के बीच आसानी से नहीं फैलते, लेकिन बंद जगहों पर इसका जोखिम बढ़ सकता है। यह वायरस शरीर की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को कमजोर कर देता है, जिससे फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है और मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ होती है।
