Ali Khamenei के निधन की आधिकारिक पुष्टि ईरानी मीडिया ने कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए संयुक्त हमले के दौरान राजधानी तेहरान में उनके कार्यालय परिसर पर मिसाइलें दागी गईं, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई। ईरान सरकार ने 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और एक सप्ताह के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है।
सरकारी प्रसारण माध्यमों पर एंकरों ने भावुक होकर इस खबर की पुष्टि की। देशभर की मस्जिदों में विशेष दुआएं पढ़ी जा रही हैं और लाखों लोग सड़कों पर उतरकर शोक जता रहे हैं। राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में काले झंडे लगाए गए हैं और सरकारी भवनों पर झंडा झुका दिया गया है।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी बयान जारी कर कहा कि देश ने अपने सर्वोच्च नेता को खो दिया है। संगठन ने इसे ‘शहादत’ करार देते हुए हमले के लिए जिम्मेदार ताकतों को कड़ा जवाब देने की बात कही है। बयान में कहा गया कि इस घटना का प्रतिशोध लिया जाएगा और इसे भुलाया नहीं जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले में उनके परिवार के कुछ सदस्य भी हताहत हुए थे। इससे पहले उनके आवास और दफ्तर को निशाना बनाकर कई मिसाइलें दागी गई थीं। सुरक्षा एजेंसियों ने घटनास्थल को सील कर जांच शुरू कर दी है।

अरब देशों में भी इस घटना पर शोक व्यक्त किया गया है। कई देशों ने तीन दिन के शोक की घोषणा की है और धार्मिक नेताओं ने श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया है। ईरान में इस समय गहरा मातम है और राजनीतिक नेतृत्व आगे की रणनीति तय करने में जुटा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पिछले तीन महीनों से क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ था। कूटनीतिक प्रयासों के तीन दौर विफल होने और लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच यह हमला हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सैन्य कार्रवाई के आदेश के बाद हालात और बिगड़ गए थे।
विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना का प्रभाव न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर भी गहरा असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
