पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का दूसरा और अंतिम चरण लोकतंत्र के उत्सव और राजनीतिक रंजिश के अनूठे मेल का गवाह बना। भारी तनाव, छिटपुट हिंसा और तोड़फोड़ के बीच राज्य के मतदाताओं ने अभूतपूर्व उत्साह दिखाते हुए 91.66% मतदान किया। चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण की 93.19% और दूसरे चरण की भारी वोटिंग को मिलाकर कुल औसत 92.47% रहा, जो बंगाल के चुनावी इतिहास में एक नया कीर्तिमान है। हालांकि, मतदान की इस चमक के पीछे हिंसा का साया भी रहा, जिसने कई जिलों में तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी।

दूसरे चरण की 142 सीटों पर हुए इस मतदान में नदिया, दक्षिण 24 परगना और हुगली जैसे जिलों से झड़पों की खबरें आईं। कालीघाट और भवानीपुर जैसे हाई-प्रोफाइल क्षेत्रों में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक देखी गई। नदिया के छपरा और शांतिपुर में बीजेपी एजेंटों पर हमले और कार्यालयों में तोड़फोड़ के आरोप लगे, जबकि दक्षिण 24 परगना में आईएसएफ ने अपने एजेंटों को रोकने का दावा किया। इस बीच, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्रीय बलों पर ‘बीजेपी की प्राइवेट आर्मी’ होने का गंभीर आरोप लगाया और एक बुजुर्ग मतदाता की मृत्यु के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद ‘खेला खत्म’ होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव ‘जनता बनाम ममता’ था और 4 मई को टीएमसी की विदाई निश्चित है। दूसरी ओर, टीएमसी इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी जीत के प्रति आश्वस्त है। 2021 में इन 142 सीटों में से 123 पर कब्जा करने वाली टीएमसी के लिए यह साख बचाने की लड़ाई है, वहीं बीजेपी के लिए बंगाल की सत्ता तक पहुँचने का रास्ता इन्हीं शहरी और ग्रामीण केंद्रों से होकर गुजरता है। अब सबकी नजरें 4 मई के नतीजों पर हैं, जो बंगाल का भविष्य तय करेंगे।
