राष्ट्रीय राजधानी के सराफा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और खरीदारों के बीच हलचल मच गई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर ने वैश्विक बुलियन मार्केट के समीकरण बिगाड़ दिए हैं, जिसका सीधा असर दिल्ली के स्थानीय बाजार पर पड़ा। मंगलवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,800 रुपये टूटकर 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। चांदी में और भी बड़ी गिरावट देखी गई, जहां कीमतें 6,500 रुपये प्रति किलोग्राम गिरकर 2.50 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 2.44 लाख रुपये पर बंद हुईं।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण सक्रिय हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग, जो जेरोम पॉवेल की अध्यक्षता में आखिरी बैठक है, ने अनिश्चितता का माहौल पैदा किया है। जानकारों के अनुसार, महंगाई की चिंताओं और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की संभावनाओं ने सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच परमाणु वार्ता को लेकर आई तल्खी की खबरों ने डॉलर इंडेक्स को मजबूती दी है, जिससे कीमती धातुओं के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी 2 प्रतिशत से ज्यादा गिर गए।
HDFC सिक्योरिटीज और अन्य कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने महंगाई का डर बढ़ा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप बॉन्ड यील्ड में तेजी आई है। यह स्थिति सोने की कीमतों के लिए प्रतिकूल साबित हो रही है। फिलहाल निवेशक अमेरिका के आने वाले रोजगार और उपभोक्ता विश्वास के आंकड़ों पर नजर गड़ाए हुए हैं। जानकारों का कहना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव और फेड रिजर्व की नीतियों में स्पष्टता नहीं आती, तब तक सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का यह सिलसिला जारी रह सकता है।
