वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए शुक्रवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। मिडिल ईस्ट में युद्ध के बादलों के छंटने और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के पूरी तरह खुलने की खबर ने कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट ला दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें देखते ही देखते 10 फीसदी तक टूट गईं, जिससे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। यह गिरावट उन आशंकाओं के खत्म होने के बाद आई है, जिनमें माना जा रहा था कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ बंद हो सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। मार्ग खुलने और जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की पुष्टि के बाद बाजार में मची घबराहट शांत हुई और निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर भारी मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी। वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी फिसलकर 83-86 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर की संभावनाओं और कूटनीतिक वार्ताओं ने बाजार की धारणा को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे आने वाले हफ्तों में ऊर्जा संकट का खतरा फिलहाल टल गया है।
भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक आयात करते हैं, यह खबर किसी वरदान से कम नहीं है। कच्चे तेल के सस्ता होने से घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इसका सीधा असर महंगाई दर में गिरावट के रूप में देखने को मिल सकता है। आर्थिक जानकारों का अनुमान है कि सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में शानदार तेजी आएगी, विशेषकर पेंट, टायर और एयरलाइंस जैसे उन सेक्टर्स में, जहाँ कच्चे तेल का इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में होता है। यदि भू-राजनीतिक हालात स्थिर रहते हैं, तो वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में और भी नरमी देखी जा सकती है।
