कलकत्ता हाई कोर्ट ने आपत्तिजनक वीडियो मामले में शर्मिष्ठा पनोली को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया. साथ ही कोर्ट ने राज्य को अगली सुनवाई में केस डायरी दाखिल करने का निर्देश दिया. पुणे की कानून की छात्रा शर्मिष्ठा पनोली को एक विशेष धर्म को निशाना बनाकर की गई अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में कोलकाता पुलिस ने गुरुवार रात गुरुग्राम से गिरफ्तार किया था। उसे ट्रायल कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। शर्मिष्ठा ने इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया था.

शर्मिष्ठा पनोली को राहत नहीं देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा, “हमारे देश के एक वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है. हमें बोलने की आजादी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचाएं. हमारा देश विविधताओं से भरा हुआ है.” सुनवाई के दौरान शर्मिष्ठा के वकील ने कहा कि उसकी गिरफ्तारी अवैध थी। क्योंकि एफआईआर में बताए गए सभी अपराध गैर संज्ञेय थे. उनको गिरफ्तारी से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया.जबकि यह नए कानून के तहत जरूरी है। वकील ने दावा किया कि पनोली के परिवार ने भी पुलिस में शिकायत की थी कि वह खतरे में है और कथित आपत्तिजनक पोस्ट को 7 मई की रात को पोस्ट करने के बाद 8 मई को सोशल मीडिया से हटा दिया गया था। उन्होंने पनोली के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की प्रार्थना की तथा उन्हें जमानत देने की मांग की.

इस पर राज्य सरकार के वकील ने कहा कि नोटिस जारी किया गया था, लेकिन पनोली और उनका परिवार गुरुग्राम भाग गया था। इस वजह से कानूनी नोटिस देने के कई प्रयास विफल रहे। इसके बाद एक अदालत ने गिरफ्तारी का वारंट भी जारी किया, जिसके आधार पर उसे गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया। मामले की उचित जांच की गई और इस बाबत कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया.

हलांकि पैगंबर मुहम्मद के बारे में आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में इंफ्लुएंसर व कानून की छात्रा शर्मिष्ठा पनौली के विरुद्ध कोलकाता के गार्डेनरीच थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने वाला वजाहत खान कादरी रशीदी खुद कई मामलों में आरोपित है. कादरी के विरुद्ध इंटरनेट मीडिया पर सांप्रदायिक और भड़काऊ पोस्ट करने को लेकर कोलकाता पुलिस के साइबर सेल व महानगर के विभिन्न थानों में कम से कम सात प्राथमिकी दर्ज हैं.

