गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बार फिर अपना अभेद्य किला साबित कर दिया है। राज्य की सभी 15 नगर निगम सीटों के आए नतीजों ने विपक्षी दलों के हौसले पस्त कर दिए हैं। भाजपा ने न केवल सभी नगर निगमों में ‘क्लीन स्वीप’ किया, बल्कि 84 में से 70 नगरपालिकाओं पर भी भगवा परचम लहरा दिया है। इस चुनावी जीत ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य में शहरी और अर्ध-शहरी मतदाताओं का भरोसा अब भी पूरी तरह भाजपा के साथ बना हुआ है।

अहमदाबाद से लेकर सूरत और राजकोट तक, भाजपा की लहर ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के वजूद पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अहमदाबाद महानगरपालिका की 192 सीटों में से 158 पर भाजपा ने कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सकी। सूरत में भी स्थिति अलग नहीं रही, जहां 120 में से 115 सीटें जीतकर भाजपा ने विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया। राजकोट में भी भाजपा ने 72 में से 65 सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम रखा। इस चुनाव में सबसे चर्चित हार क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की बहन नयनाबा जडेजा की रही, जो राजकोट के वार्ड नंबर 2 से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव हार गईं।
शिक्षा मंत्री रिवाबा जडेजा ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं के कड़े परिश्रम को दिया है। दूसरी ओर, कांग्रेस और ‘आप’ के लिए ये नतीजे आत्ममंथन का विषय हैं। सूरत में जहां पिछली बार आम आदमी पार्टी ने मजबूती दिखाई थी, वहां इस बार वह मात्र 4 सीटों पर सिमट गई। जिला पंचायतों में भी भाजपा का ही बोलबाला रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की यह संगठनात्मक मजबूती आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए एक निर्णायक आधार तैयार कर रही है, वहीं विपक्ष के लिए गुजरात की जमीन अब और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है।
