पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच क्या भारत में एक बार फिर लॉकडाउन जैसी स्थिति बनने वाली है? इस सवाल पर मोदी सरकार के संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। केंद्रीय मंत्री ने साफ किया है कि भारत में अभी हालात इतने नहीं बिगड़े हैं कि लॉकडाउन जैसा सख्त कदम उठाना पड़े, लेकिन भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए अभी से सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

‘भारत में इतनी क्राइसिस नहीं कि लॉकडाउन लगे’
एक न्यूज़ चैनल से बातचीत के दौरान किरेन रिजिजू ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण दुनिया भर में एनर्जी क्राइसिस (ऊर्जा संकट) गहरा गया है और व्यापारिक मार्ग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा, “भारत ने पश्चिम एशिया में यह तनाव पैदा नहीं किया है, लेकिन दुर्भाग्य से हम भी इस संकट के प्रभाव से बच नहीं पा रहे हैं। हम बाहरी दया पर निर्भर नहीं रह सकते, इसलिए हमें खुद के स्तर पर तैयारी करनी होगी।” रिजिजू ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने, पैनिक बाइंग (डर में आकर जरूरत से ज्यादा खरीदारी) से बचने और अनावश्यक खर्चों को कम करने का आह्वान इसी तैयारी का एक हिस्सा है।

घरेलू उत्पादन और आत्मनिर्भरता पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों से प्रधानमंत्री मोदी लगातार घरेलू उत्पादन बढ़ाने और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिशों में जुटे हैं। हालांकि, भारत अभी भी दुनिया में तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर होने वाली हलचल का असर यहाँ भी पड़ता है। रिजिजू ने देशवासियों से अपील की कि संकट के इस असामान्य समय में हमें अपने लीडर की बात को गंभीरता से सुनना और मानना चाहिए।
विपक्ष पर तीखा हमला
इस संकट के समय हो रही बयानबाजी पर किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुश्किल घड़ी में देश का साथ देने के बजाय विपक्ष इस पूरे मुद्दे का राजनीतिकरण करने में जुटा है। उन्होंने कहा, “मैं संसद में विपक्ष को इसका जवाब देना चाहता हूँ। संकट के समय पूरे देश को अपने नेता के साथ एकजुट होना चाहिए। जब हालात सामान्य हो जाएं, तब राजनीति कर लीजिएगा, लेकिन इस मुश्किल वक्त में हर किसी का सहयोग जरूरी है।”
