पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और वैश्विक ईंधन संकट के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लगभग 20 हजार टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर आ रहा विशाल समुद्री टैंकर ‘सिमी’ दुनिया के सबसे संवेदनशील और खतरनाक समुद्री मार्ग ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) को सफलतापूर्वक पार कर सुरक्षित रूप से गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल पोर्ट पहुँच गया है।

अत्यंत संवेदनशील मार्ग से सुरक्षित सफर
जानकारी के अनुसार, ‘सिमी’ मार्शल आइलैंड्स के ध्वज वाला एक एलपीजी कैरियर जहाज है, जिसमें कुल 19,965 टन एलपीजी कार्गो लोड था। यह जहाज 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरा था, जहाँ इस समय युद्ध जैसे हालातों के कारण समुद्री व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा संकट मंडरा रहा है। इस जहाज पर कुल 21 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 8 यूक्रेन और 13 फिलीपींस के नागरिक शामिल हैं।
भारत सरकार का दमदार कोर्डिनेशन
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की तेल और गैस सप्लाई की लाइफलाइन माना जाता है। इस मार्ग पर बढ़ते खतरों को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट थी। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, ‘सिमी’ की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए देश के चार बड़े मंत्रालयों— जहाजरानी (शिपिंग) मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय ने आपस में बेहतरीन तालमेल (कोर्डिनेशन) बिठाकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया और जहाज की पल-पल की मूवमेंट पर पैनी नजर रखी।
ईरान का भारत को बड़ा आश्वासन
इस सफल अभियान के पीछे कूटनीतिक प्रयास भी शामिल रहे। बीते शुक्रवार को ही ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर विशेष बातचीत की थी। इस दौरान अराघची ने भारत को आश्वस्त किया था कि वाणिज्यिक सुरक्षा (Commercial Safety) के लिए भारत पूरी तरह ईरान पर भरोसा कर सकता है और ईरान होर्मुज क्षेत्र में सुरक्षा के रक्षक के रूप में अपना कर्तव्य निभाता रहेगा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का तनाव आगे और बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भारत के घरेलू बाजार में एलपीजी की निर्बाध सप्लाई बनाए रखने के लिए ‘सिमी’ जैसे जहाजों का समय पर भारत पहुँचना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा बूस्टर साबित होगा।
