यदि आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत भरी खबर है। पिछले दो दिनों से घरेलू और वैश्विक सर्राफा बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड ₹16,000 प्रति किलोग्राम तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सोने की कीमतों पर भी तगड़ा दबाव देखा जा रहा है और यह भी कमजोर हुआ है।

क्यों आई कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार विश्लेषकों (Experts) के मुताबिक, इस भारी गिरावट के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, लगातार आ रही तेजी के बाद बाजार में बड़े पैमाने पर ‘मुनाफावसूली’ (Profit Booking) शुरू हो गई है। दूसरा सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) का मजबूत होना है। डॉलर इंडेक्स 0.23% की बढ़त के साथ 98.955 के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले पांच हफ्तों का सबसे उच्चतम स्तर है। जब भी डॉलर मजबूत होता है, निवेशक सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश से दूरी बनाकर डॉलर की तरफ रुख करते हैं, जिससे कीमती धातुओं के दाम गिरते हैं।
खपत में आ सकती है 10-15% की कमी, ग्राहकों की बदली पसंद
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट (Middle East Crisis) और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में चल रही उथल-पुथल की वजह से सोने पर उच्च आयात शुल्क (Import Duty) अगले एक साल तक बरकरार रह सकता है। इस स्थिति के कारण देश में सोने की कुल खपत (Volume) में 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है। यही वजह है कि अब ग्राहक भारी-भरकम गहनों के बजाय हल्के वजन वाली ज्वेलरी (Light-weight jewellery) खरीदने को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
निवेशकों के लिए एक्सपर्ट की राय
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह गिरावट केवल एक शॉर्ट-टर्म करेक्शन (अस्थायी सुधार) है और लंबी अवधि के लिहाज से वे अभी भी सोने-चांदी को लेकर बुलिश (सकारात्मक) हैं। जो लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट खरीदारी का एक अच्छा मौका साबित हो सकती है। उद्योग जगत इस मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए जल्द ही एक बड़ी बैठक आयोजित करने जा रहा है।
