संसद के भीतर महिला आरक्षण विधेयक पर चल रही गरमागरम बहस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक बिल्कुल अलग और बेहद सौम्य रूप देखने को मिला। विपक्ष पर तीखे हमलों के लिए मशहूर प्रधानमंत्री ने इस बार सुलह और सहयोग का रास्ता चुनते हुए एक ऐसा ऑफर दिया, जिसने सियासी गलियारों को चौंका दिया है। पीएम मोदी ने विपक्षी दलों से अपील की कि वे इस बिल को राजनीति के तराजू में न तौलें और यदि उन्हें क्रेडिट की चिंता है, तो वे ‘ब्लैंक चेक’ लेने को तैयार रहें। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि सरकार सभी विपक्षी नेताओं की फोटो सरकारी खर्च पर छपवाने को तैयार है, बस शर्त यह है कि आधी आबादी के हक वाले इस कानून को निर्बाध रूप से पारित होने दिया जाए।

प्रधानमंत्री ने सदन में भावुक होते हुए कहा कि यह समय ‘मैं’ और ‘तुम’ के विवाद में पड़ने का नहीं है। उन्होंने इसे दशकों पुराने ‘अपराध का प्रायश्चित’ करने का अवसर बताते हुए कहा कि हम महिलाओं पर कोई अहसान नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्हें उनका हक दे रहे हैं जिसे चालाकी और तकनीकी अड़चनों के बहाने पिछले तीन दशकों से रोका गया था। जब एक महिला सांसद ने परिसीमन के दौरान राज्यों के साथ होने वाले संभावित भेदभाव पर सवाल उठाया, तो पीएम ने डंके की चोट पर कहा, “यह मेरी गारंटी है कि किसी के साथ पक्षपात नहीं होगा।” उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं का जिक्र करते हुए इसे अपना ‘अटल वादा’ करार दिया।
विपक्ष को चेतावनी देते हुए पीएम ने यह भी साफ कर दिया कि आज की महिला 25 साल पहले की तरह खामोश नहीं है। अब वह ‘ओपिनियन लीडर’ है और वोकल (मुखर) हो चुकी है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जो भी दल इस बिल का विरोध करेगा, उसे आने वाले लंबे समय तक इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी क्योंकि जमीन पर नेतृत्व कर रही लाखों महिलाएं इस बार माफ करने के मूड में नहीं हैं। पीएम ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस बिल से किसी व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ की लालसा नहीं है, लेकिन विरोध करने वालों का नुकसान तय है। अब गेंद विपक्ष के पाले में है कि वह ‘क्रेडिट’ और ‘फोटो’ के इस ऑफर के बाद महिला शक्ति के हक में खड़ा होता है या फिर पुरानी तकनीकी अड़चनों का सहारा लेता है।
