बिहार के सियासी इतिहास में आज एक नया और भगवा अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता सम्राट चौधरी आज सुबह 11 बजे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। यह ऐतिहासिक क्षण इसलिए है क्योंकि अपनी स्थापना के बाद से पहली बार भाजपा बिहार में ‘बड़े भाई’ की भूमिका में आकर मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने जा रही है। राजभवन के प्रांगण में आयोजित होने वाले इस भव्य समारोह में सम्राट चौधरी के साथ जनता दल यूनाइटेड (JDU) के दो दिग्गज नेता, विजय चौधरी और विजेंद्र यादव भी उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं। इस बदलाव ने न केवल राज्य की सत्ता का समीकरण बदल दिया है, बल्कि दशकों पुराने ‘नीतीश युग’ के बाद एक नए नेतृत्व की नींव रख दी है।

सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना उनके निजी राजनीतिक सफर के लिए भी एक बड़ा कीर्तिमान है। राजद से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले सम्राट ने हम (HAM) और जदयू जैसे दलों का सफर तय करते हुए भाजपा में अपनी जगह बनाई और आज राज्य के शीर्ष पद तक पहुँचे हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनके साथ शपथ लेने वाले दोनों संभावित डिप्टी सीएम—विजय चौधरी और विजेंद्र यादव—भी दलबदल और राजनीतिक अनुभवों की लंबी फेहरिस्त रखते हैं। विजय चौधरी जहाँ कभी कांग्रेस का हिस्सा थे, वहीं विजेंद्र यादव 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के करीबी मंत्री रह चुके हैं। इन तीनों अनुभवी चेहरों का एक साथ आना एनडीए (NDA) की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें भाजपा के जोश और जदयू के प्रशासनिक अनुभव का तालमेल बिठाने की कोशिश की गई है।
मंगलवार शाम को राज्यपाल सैयद अता हसनैन से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद से ही पटना में जश्न का माहौल है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आज केवल मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों का ही ‘राजतिलक’ होगा, जबकि पूर्ण मंत्रिमंडल का विस्तार और विभागों का बंटवारा आने वाले कुछ दिनों में किया जाएगा। सम्राट चौधरी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी गठबंधन सरकार में स्थिरता बनाए रखने और बिहार के विकास को एक नई गति देने की होगी। पूरे देश की नजरें आज पटना पर टिकी हैं, जहाँ से बिहार की राजनीति की एक नई दिशा तय होने जा रही है।
