संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. आंबेडकर की 135वीं जयंती के पावन अवसर पर आज संसद परिसर में एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण राजनीतिक दृश्य देखने को मिला। संसद के ‘प्रेरणा स्थल’ पर बाबासाहेब को श्रद्धांजलि देने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच संक्षिप्त लेकिन बेहद अहम बातचीत हुई। सूत्रों के अनुसार, इस औपचारिक मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने आगामी विशेष सत्र में पेश होने वाले ‘महिला आरक्षण संशोधन विधेयक’ पर विपक्ष का सहयोग मांगा। प्रधानमंत्री ने खड़गे से आग्रह किया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लाए जा रहे इस ऐतिहासिक बिल का सभी दल एकजुट होकर समर्थन करें।

संसद के गलियारों में हुई इस चर्चा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। इस सत्र का मुख्य एजेंडा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक संशोधनों को पारित करना है। प्रधानमंत्री के प्रस्ताव पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने सधे हुए अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि वह अपनी पार्टी के भीतर और गठबंधन के साथियों के साथ चर्चा करने के बाद ही कोई निर्णय लेंगे। यह मुलाकात संकेत देती है कि सरकार इस कानून को लेकर किसी भी तरह की देरी के मूड में नहीं है और विपक्ष को विश्वास में लेकर आगे बढ़ना चाहती है।
दूसरी ओर, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर विधिवत समर्थन की अपील की है। सरकार का लक्ष्य है कि परिसीमन और जनगणना से जुड़ी प्रक्रियाओं के बीच इस कानून को जल्द से जल्द वैधानिक मजबूती दी जाए। आज पूरा देश बाबासाहेब आंबेडकर को याद कर रहा है, जिन्होंने एक समतामूलक समाज का सपना देखा था। ऐसे में संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के शीर्ष नेताओं के बीच महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने जैसे प्रगतिशील मुद्दे पर हुई यह बातचीत भारतीय लोकतंत्र की एक सकारात्मक तस्वीर पेश करती है। अब सबकी निगाहें 16 अप्रैल से शुरू होने वाले तीन दिवसीय सत्र पर टिकी हैं, जहाँ महिला शक्ति के भाग्य का फैसला होगा।
