पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के साथ टेलीफोन पर महत्वपूर्ण चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र ऊर्जा ठिकानों पर हो रहे हमले और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा रहा। पीएम मोदी ने दो टूक शब्दों में कहा कि ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे, क्योंकि इनका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जनता पर पड़ता है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस संवाद की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय स्थिरता और नेविगेशन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) सुनिश्चित करने पर सहमति बनी है। विशेष रूप से लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर भारत और सऊदी अरब एक सुर में नजर आए। पीएम मोदी ने सऊदी अरब में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों के कल्याण के लिए क्राउन प्रिंस का आभार भी व्यक्त किया, जो युद्ध के इस अनिश्चित समय में वहां कार्यरत हैं।
यह कूटनीतिक सक्रियता तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब हाल ही में पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी इसी मुद्दे पर बात की थी। जहाँ एक तरफ अमेरिका और इजरायल के हमलों के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से आवाजाही लगभग ठप है, वहीं ईरान ने भारत समेत 5 मित्र देशों (चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान) के जहाजों को “सुरक्षित रास्ता” देने का भरोसा दिया है। भारत इस समय एक कुशल मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जहाँ वह एक ओर सऊदी अरब और अमेरिका जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, तो दूसरी ओर ईरान के साथ समन्वय कर अपने व्यापारिक हितों (LPG और तेल टैंकरों) की रक्षा कर रहा है।
