बिहार की सियासत में रविवार का दिन एक नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच आखिरकार मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar ने सक्रिय राजनीति में कदम रख दिया। पटना स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने औपचारिक रूप से Janata Dal (United) की सदस्यता ग्रहण की।
इस मौके पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha और प्रदेश अध्यक्ष Umesh Kushwaha सहित कई नेताओं ने उनका स्वागत किया। नेताओं ने उम्मीद जताई कि निशांत के जुड़ने से पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी।

अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में निशांत कुमार ने कहा कि राजनीति में उनका कदम पार्टी के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए है। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए कहा कि संगठन की ताकत ही किसी भी राजनीतिक दल की असली पूंजी होती है और वह एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह पार्टी के लिए काम करना चाहते हैं।
उन्होंने अपने पिता के लंबे राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में बिहार में जो बदलाव देखने को मिले हैं, उन्हें जनता तक और मजबूती से पहुंचाना जरूरी है। निशांत ने कहा कि राज्य के विकास और सुशासन की जो नींव रखी गई है, उसे आगे बढ़ाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
कार्यक्रम के दौरान कई नेताओं ने यह भी कहा कि युवा पीढ़ी के राजनीति में आने से लोकतंत्र को मजबूती मिलती है। उनका मानना है कि निशांत कुमार का राजनीतिक सफर आने वाले समय में बिहार की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के परिवार से किसी सदस्य का सक्रिय राजनीति में आना राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे आने वाले समय में जदयू की रणनीति और नेतृत्व संरचना पर भी असर पड़ सकता है।
