पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था में मची उथल-पुथल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपने आवास पर ‘कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी’ (CCS) की एक मैराथन बैठक की अध्यक्षता की। लगभग 3 घंटे तक चली इस उच्च-स्तरीय समीक्षा में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि दुनिया में युद्ध भले ही कहीं भी हो, उसका बोझ भारत के सामान्य नागरिक और किसान की जेब पर नहीं पड़ना चाहिए। बैठक में ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के संकट से निपटने और घरेलू बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को स्थिर रखने के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार किया गया है।

प्रधानमंत्री ने राज्यों को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि युद्ध की आड़ में एलपीजी (LPG) और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कालाबाजारी या जमाखोरी करने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाए। बैठक के दौरान कैबिनेट सचिव ने आश्वस्त किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने कई देशों से आयात बढ़ाकर घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित कर लिया है। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि रसोई गैस की उपलब्धता में कोई कमी न आए और अफवाहों के कारण होने वाली ‘पैनिक बाइंग’ को रोका जा सके। इसके लिए केंद्र सरकार ने खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर रियल-टाइम नजर रखने के लिए विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित कर दिए हैं।
कृषि प्रधान भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता उर्वरकों (Fertilizers) की आपूर्ति को लेकर थी, जिस पर पीएम मोदी ने विशेष ‘बैकअप प्लान’ पेश किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीफ और रबी सीजन के लिए यूरिया और डीएपी (DAP) का पर्याप्त स्टॉक हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, गर्मियों की आहट को देखते हुए बिजली संकट से बचने के लिए गैस आधारित पावर प्लांट्स और थर्मल सेंटरों के लिए कोयले की निर्बाध सप्लाई का रोडमैप तैयार किया गया है। पीएम मोदी ने अंत में अधिकारियों को सचेत किया कि युद्ध के इस दौर में गलत जानकारी और अफवाहें सबसे बड़ा दुश्मन हैं, इसलिए जनता तक केवल प्रामाणिक और सटीक सूचना ही पहुँचनी चाहिए।
