परीक्षा के दबाव से जूझ रहे लाखों छात्रों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर संवाद का पुल बनाया। ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से आए विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए पीएम मोदी ने पढ़ाई को जीवन से जोड़ने की बात कही और कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक हासिल करना नहीं, बल्कि खुद को समझना और निखारना होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पढ़ाई की शुरुआत किताबों से पहले मन से होनी चाहिए। जब मन स्थिर और जुड़ा हुआ होता है, तभी ज्ञान सही दिशा में काम करता है। उन्होंने समझाया कि लक्ष्य ऐसे होने चाहिए जो प्रेरणा दें, लेकिन तुरंत हाथ में न आ जाएं, ताकि आगे बढ़ने की भूख बनी रहे।
इस संवाद के दौरान पीएम मोदी ने अपने अनुभव भी साझा किए और बताया कि समय के साथ उन्होंने खुद भी इस कार्यक्रम के स्वरूप में बदलाव किया है। उनका कहना था कि बदलते दौर के साथ संवाद के तरीके बदलना जरूरी है, लेकिन उद्देश्य वही रहना चाहिए, यानी छात्रों को आत्मविश्वास देना और तनाव से मुक्त करना।

कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक जुड़ाव भी देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री ने छात्रों का स्वागत असमिया गमोसा से किया। उन्होंने इसे न केवल उत्तर-पूर्व की पहचान बताया, बल्कि महिला सशक्तिकरण और परंपरा से जुड़ा एक सुंदर प्रतीक भी बताया, जो मेहनत और सम्मान का संदेश देता है।
पीएम मोदी ने शिक्षा को बोझ मानने की सोच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अधूरी समझ और केवल परीक्षा केंद्रित पढ़ाई जीवन को दिशा नहीं दे सकती। शिक्षा को जीवन कौशल, सोच और व्यवहार से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल दौर में इंटरनेट का सही और सीमित उपयोग ही छात्रों को आगे ले जा सकता है।
स्किल डेवलपमेंट पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने ज्ञान, अवलोकन और अभ्यास के संतुलन को अहम बताया। उनका कहना था कि चाहे जीवन कौशल हों या पेशेवर दक्षता, दोनों की जड़ें ज्ञान में ही होती हैं। शिक्षकों को भी उन्होंने सलाह दी कि वे छात्रों की गति से एक कदम आगे चलने की कोशिश करें, ताकि सीखने की प्रक्रिया जीवंत बनी रहे।
‘परीक्षा पे चर्चा’ का यह संस्करण छात्रों के लिए केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जीवन को बेहतर समझने और संतुलन के साथ आगे बढ़ने का संदेश देकर समाप्त हुआ।
