पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर मची अंतर्कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। राज्य में एक तरफ जहाँ टीएमसी नियंत्रित नगर निकायों में चल रहे आंतरिक विवाद के कारण करीब 100 पार्षदों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी की कद्दावर सांसद काकोली घोष ने भी बगावती तेवर अपना लिए हैं। इस पूरे सियासी घमासान के बीच मंगलवार को टीएमसी सांसद काकोली घोष अपनी ही पार्टी के छह विधायकों के साथ बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुईं, जिसके बाद बंगाल के राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म हो गया है।

शुभेंदु की बैठक में पहुँचे टीएमसी के ये 6 विधायक
बारासात से टीएमसी सांसद काकोली घोष हाल ही में जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर अपना असंतोष जाहिर कर चुकी हैं। ऐसे में बीजेपी सरकार के आधिकारिक मंच पर उनकी और अन्य विधायकों की मौजूदगी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की इस समीक्षा बैठक में उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए थे। बैठक में शामिल होने वाले टीएमसी के विधायकों में:
देगंगा से विधायक अनीसुर रहमान बिस्वास
स्वरूपनगर से विधायक बीना मंडल
हरोआ से विधायक मोहम्मद अब्दुल मतीन
बसीरहाट क्षेत्र के तीन अन्य टीएमसी विधायक शामिल हैं।
नेताओं की सफाई: ‘विकास और आमंत्रण के लिए आए’
बैठक में शामिल होने के बाद टीएमसी नेताओं ने इसे पूरी तरह प्रशासनिक बताया। स्वरूपनगर की विधायक बीना मंडल ने कहा, “मैं अपने क्षेत्र के विकास के मुद्दों को लेकर यहाँ आई हूँ और हमारे कुल छह विधायक इस बैठक में शामिल हुए हैं।” वहीं हरोआ के विधायक मोहम्मद अब्दुल मतीन ने कहा, “चूंकि राज्य सरकार ने हमें आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया था, इसलिए मैं एक जनप्रतिनिधि और विधायक के रूप में इस बैठक का हिस्सा बना हूँ।”
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दी प्रतिक्रिया
बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी नेताओं की मौजूदगी की सराहना की और इसे बंगाल की राजनीति में एक नई शुरुआत बताया। शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “यह पश्चिम बंगाल की पुरानी और प्रतिशोधात्मक राजनीतिक संस्कृति से अलग हमारी एक नई पहल है। जब हम विपक्ष में थे, तब तत्कालीन सरकार हमें प्रशासनिक बैठकों में नहीं बुलाती थी। लेकिन हमने तय किया है कि विकास के लिए सभी विधायकों को आमंत्रित किया जाएगा। मुझे खुशी है कि बारासात की सांसद काकोली घोष ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। बसीरहाट के भी कई विपक्षी विधायक यहाँ आए और हमने उनमें से एक को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव में हार के बाद 100 पार्षदों का इस्तीफा और शीर्ष नेताओं की मुख्यमंत्री के साथ यह बैठक टीएमसी के भीतर एक बड़े राजनीतिक उलटफेर का संकेत दे रही है।
