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पूर्व सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता में FIR दर्ज; मार्च 2026 में दिए ‘भड़काऊ’ भाषण को लेकर बढ़ीं मुश्किलें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन का सबसे बुरा दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ जहां उनके 19 लोकसभा सांसद और 64 विधायक बगावत का झंडा बुलंद कर ऋतब्रत बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के पाले में जा चुके हैं, वहीं अब ममता बनर्जी के खिलाफ कानूनी शिकंजा भी कस गया है। कोलकाता पुलिस ने एक कारोबारी की शिकायत पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एक भड़काऊ और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले भाषण के आरोप में आधिकारिक तौर पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है।

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मार्च 2026 के एस्प्लेनेड भाषण से जुड़ा है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला इसी साल 6 मार्च 2026 को कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में आयोजित ‘धर्म मंच’ के एक कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में सार्वजनिक मंच से बोलते हुए ममता बनर्जी ने एक बेहद विवादास्पद और भड़काऊ बयान दिया था। उन्होंने अपने भाषण में कथित तौर पर चेतावनी दी थी कि “अगर कोई खास समुदाय एक साथ आता है, तो इसके दूसरों के लिए गंभीर और भयानक नतीजे हो सकते हैं।”

कारोबारी तुषार कांति दास की शिकायत को पुलिस ने माना FIR

ममता बनर्जी के इस सार्वजनिक बयान को लेकर कोलकाता के एक स्थानीय बिजनेसमैन तुषार कांति दास ने शहर के हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन (Hare Street Police Station) में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता तुषार कांति दास ने अपनी अर्जी में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी का यह भाषण पूरी तरह भड़काऊ, समाज में दरार पैदा करने वाला और धार्मिक भावनाएं आहत करने वाला था। उन्होंने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा ऐसा बयान देना देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला है, जिससे पश्चिम बंगाल के सांप्रदायिक सौहार्द को भारी नुकसान पहुंच सकता था। कोलकाता पुलिस ने अब इस शिकायत को आधिकारिक एफआईआर में तब्दील कर मामले की कानूनी जांच शुरू कर दी है।

वैधानिक और राजनीतिक मोर्चों पर अकेली पड़ीं ‘दीदी’

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी इस समय अपने राजनीतिक करियर के सबसे चक्रव्यूह में फंस चुकी हैं। राज्यसभा से सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव जैसी कद्दावर नेताओं के इस्तीफे और लोकसभा के 19 सांसदों द्वारा एनडीए में शामिल होने की पेशकश के बीच इस आपराधिक मुकदमे ने ममता बनर्जी की मुश्किलें हजार गुना बढ़ा दी हैं। इस मामले पर फिलहाल टीएमसी के बचे हुए धड़े या ममता बनर्जी के करीबियों की तरफ से कोई आधिकारिक कानूनी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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