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कोविशिल्ड टीका लगवाया है तो डरने की जरूरत नहीं है, सीरम इंस्टीट्यूट के बाद विशेषज्ञ ने भी किया खुलासा !

भारत में कोविशिल्ड टीका बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ने अगस्त 2021 में ही यह जानकारी दे दी थी. कंपनी का कहना है कि थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम एक लाख में से एक से भी कम व्यक्ति में पाए जाने की आशंका है.

कोरोना महामारी के मार और कहर से बचने के लिए देशभर में लाखों लोगों कोविशिल्ड वैक्सीन लिया था . जिससे लाखों लोगों की जान बच पाई थी. लेकिन हालिया रिपोर्ट के बाद से कोविशिल्ड वैक्सीन के साइड इफेक्ट को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है. दरअसल कोविशिल्ड वैक्सीन की ब्रितानी फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने यह स्वीकार किया है कि कोविशिल्ड वैक्सीन से खतरनाक साइड इफेक्ट हो सकता है. कंपनी का कहना है कि इससे थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम यानी TTS की समस्या हो सकती है.

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क्या है थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (TTS) सिंड्रोम?
TTS यानि थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम जिसके चलते खून के थक्के बनते हैं और ब्रेन स्ट्रोक, कार्डियक अरेस्ट की समस्या हो सकती है.

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सीरम इंस्टीट्यूट ने क्या कहा था ?
कोविशिल्ड का विकास ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किया था तो वहीं भारत में कोविशिल्ड का उत्पादन पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट करता है. कंपनी ने अपनी बेवसाइट पर 19 अगस्त 2021 को कोविशिल्ड टीका लगवाने की वजह से होने वाले साइड इफेक्टस की जानकारी दी है. कंपनी ने कहा है कि टीका लगवाने से थ्रोम्बोसाइटोपीनिया या प्लेट्सलेट की संख्या कम होने के साथ ब्लड क्लाटिंग की समस्या हो सकती है. कंपनी ने कहा है कि यह समस्या 1 लाख में एक से भी कम लोगों में हो सकती है. कंपनी ने इसे बहुत ही दुर्लभ मामला बताया है.

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कोविशील्ड वैक्सीन से डरने की जरूरत नहीं: विशेषज्ञ
कोरोना से बचाने के लिए देश में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को कोविशील्ड के नाम से लगाया गया था. अब जब ब्रिटेन के हाई कोर्ट में एस्ट्राजेनेका ने साइड इफेक्ट की बात कबूल की है तो उन देशों में भी दहशत होने लगी है जहां पर इन वैक्सीन का इस्तेमाल हुआ था. हालांकि भारत में वैक्सीन की मॉनिटरिंग करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि इस रिपोर्ट से बेवजह घबराने की बिलकुल जरुरत नहीं है. क्योंकि जिस साइड इफेक्ट की बात सामने आ रही है वह अन्य वैक्सीन में भी होता है. कोविड महामारी के दौरान देश के मुख्य महामारी विशेषज्ञ रहे और आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ समीरन पांडा ने कहा कि लोगों को न तो डरने की जरूरत है। और न ही गूगल करके कुछ समझने की जरूरत है। वैज्ञानिक इस दिशा में आगे काम कर रहे हैं.

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कितने लोगों में नजर आते हैं लक्षण ?
इसके अलावा कंपनी ने कहा है कि सुस्ती या चक्कर आने, पेट में दर्द, लिम्फ नोड्स, अधिक पसीना आना, त्वचा में खुजली, त्वचा पर चकत्ते पड़ने की समस्या हो सकती हैं. कंपनी का कहना है कि ये समस्याएं 100 में से एक व्यक्ति को हो सकती हैं. कंपनी का कहना है कि अधिकांश साइड इफेक्टस टीका लगवाने के 5-7 दिन तक ही रहते हैं. कंपनी का कहना है कि पहली खुराक के समय रिपोर्ट किए गए साइड इफेक्टस दूसरी खुराक लेने के बाद अपेक्षाकृत कम नजर आते हैं.

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