दुनिया पर महंगाई और आर्थिक मंदी का दोहरा खतरा मंडराने लगा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने मंगलवार को जारी अपनी नवीनतम रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। आईएमएफ ने वर्ष 2026 के लिए दुनिया की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) के अनुमान को 3.3 प्रतिशत से घटाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव और ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर हमलों के कारण तेल और गैस की कीमतों में जो उबाल आया है, वह आने वाले समय में वैश्विक मुद्रास्फीति को 4.4 प्रतिशत तक धकेल सकता है।

आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरिंचास ने आगाह किया है कि पश्चिम एशिया का यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसने दुनिया भर के देशों के लिए ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। युद्ध से पहले तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त व्यापार नीतियों के बावजूद विश्व अर्थव्यवस्था लचीलापन दिखा रही थी, जिसे तकनीक और एआई (AI) क्षेत्र के भारी निवेश से मजबूती मिल रही थी। लेकिन फारस की खाड़ी में शुरू हुए इस युद्ध ने सारी गणनाओं को उलट दिया है। यदि यह ऊर्जा संकट अगले साल तक भी जारी रहता है, तो केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिससे 2027 तक वैश्विक विकास दर गिरकर महज दो प्रतिशत रह सकती है।
इस आर्थिक मंदी की सबसे ज्यादा मार यूरोप और उन गरीब देशों पर पड़ने वाली है जो ईंधन आयात पर निर्भर हैं। यूरोप में प्राकृतिक गैस की आसमान छूती कीमतों ने औद्योगिक पहियों को धीमा कर दिया है, जिसके चलते यूरो क्षेत्र की वृद्धि दर 1.4 प्रतिशत से गिरकर 1.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं, अमेरिका की विकास दर का अनुमान भी घटाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, इस पूरे संकट में रूस जैसे ऊर्जा निर्यातक देशों को फायदा होता दिख रहा है, क्योंकि ऊंची कीमतों के कारण रूसी अर्थव्यवस्था को मामूली मजबूती मिलने की उम्मीद है। आईएमएफ ने स्पष्ट किया है कि भले ही अस्थायी युद्धविराम की खबरें आ रही हों, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था को जो नुकसान पहुँच चुका है, उसकी भरपाई करना एक बड़ी चुनौती होगी।
