केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय खेल संबंधों पर अपनी सख्त नीति को बरकरार रखने का फैसला किया है। खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी एक आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, भारतीय टीमें किसी भी द्विपक्षीय सीरीज या प्रतियोगिता के लिए पाकिस्तान का दौरा नहीं करेंगी। साथ ही, पाकिस्तानी टीमों को भी भारत में ऐसी किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का यह फैसला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और खिलाड़ियों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए लिया गया है।

नीति के मुख्य बिंदु
द्विपक्षीय बैन जारी: भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी खेल में आमने-सामने की सीरीज (Bilateral) पर प्रतिबंध जारी रहेगा।
मल्टी-नेशनल इवेंट्स में छूट: ओलंपिक, वर्ल्ड कप या एशियाई खेलों जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में दोनों देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे के खिलाफ खेल सकेंगे। भारत में आयोजित होने वाले ऐसे वैश्विक आयोजनों में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को आने की अनुमति दी जाएगी।
पृष्ठभूमि: यह नीति पहली बार अगस्त 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद लागू की गई थी। सरकार ने साफ कर दिया है कि सीमा पार आतंकवाद और खेल साथ-साथ नहीं चल सकते।
ग्लोबल स्पोर्ट्स हब बनने की तैयारी
रत 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 के ओलंपिक की मेजबानी का प्रबल दावेदार है। इसी विजन को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय एथलीटों, कोचों और खेल संस्थाओं के पदाधिकारियों के लिए वीजा प्रक्रिया को बेहद सरल बनाने का ऐलान किया है। अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स बॉडीज के प्रमुखों को प्राथमिकता के आधार पर 5 साल का मल्टी-एंट्री वीजा दिया जाएगा। साथ ही, खेल मंत्रालय ने अपना कामकाज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपना कार्यालय शास्त्री भवन से हटाकर नेताजी नगर स्थित नए आधुनिक परिसर में स्थानांतरित कर दिया है।
