अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने 100 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर लिया है। इस वैश्विक उछाल का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाला है। सरकारी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार और तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹4 से ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने की योजना बना रही हैं। इसके साथ ही, घरेलू रसोई गैस (LPG) के उपभोक्ताओं को भी ₹40 से ₹50 प्रति सिलेंडर का अतिरिक्त बोझ सहना पड़ सकता है।

तेल कंपनियों का तर्क है कि कच्चे तेल की खरीद महंगी होने और खुदरा कीमतों में लंबे समय से बदलाव न होने के कारण उन्हें भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है। वर्तमान में पश्चिम एशिया के अस्थिर हालात ने ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे सरकार के लिए भी सब्सिडी के जरिए राहत देना मुश्किल होता जा रहा है। हालांकि, सरकार इस बात का ध्यान रख रही है कि कीमतों में वृद्धि का समय और सीमा इस तरह तय की जाए जिससे आम जनता के घरेलू बजट पर अचानक बहुत ज्यादा दबाव न आए।
महंगाई का यह संभावित हमला कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में पहले ही हुई ₹993 की भारी वृद्धि के बाद आ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो ईंधन की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ेगा, जिससे सब्जियां, दूध और अन्य रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। अगले 5 से 7 दिनों के भीतर इस संबंध में आधिकारिक घोषणा होने की पूरी उम्मीद है। सरकार वर्तमान में टैक्स कटौती और वित्तीय घाटे के बीच संतुलन बनाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर मंथन कर रही है।
