करोड़ों व्हाट्सएप और टेलीग्राम उपयोगकर्ताओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने उस बहुप्रतीक्षित ‘सिम बाइंडिंग’ गाइडलाइन को 31 दिसंबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया है, जिसे लेकर पिछले कुछ हफ्तों से काफी चर्चा थी। इस निर्णय का सीधा मतलब यह है कि अब उपयोगकर्ताओं को अपने मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने के लिए अनिवार्य रूप से सिम कार्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही वेब वर्जन्स पर बार-बार लॉग-आउट होने की समस्या का सामना करना पड़ेगा। पहले यह नियम 30 मार्च से लागू होने वाला था, लेकिन एप्पल (Apple) जैसी तकनीकी दिग्गज कंपनियों द्वारा जताई गई चिंताओं और तकनीकी बाधाओं के चलते सरकार ने इस डेडलाइन को साल के अंत तक बढ़ा दिया है।

दरअसल, सरकार पिछले साल नवंबर में इन सख्त गाइडलाइंस को लेकर आई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी और क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल अपराधों पर नकेल कसना था। दूरसंचार विभाग का तर्क था कि अक्सर अपराधी उन इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स का फायदा उठाते हैं जो सिम कार्ड हटाए जाने के बाद भी सक्रिय रहते हैं। नए नियमों के अनुसार, किसी भी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को सेवा देने के लिए डिवाइस में एक ‘एक्टिव सिम कार्ड’ का होना अनिवार्य बनाया जाना था, साथ ही वेब वर्जन का उपयोग करने पर 6 घंटे के भीतर स्वतः लॉग-आउट होने का प्रावधान भी शामिल था। हालांकि, एप्पल ने इन निर्देशों पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद कंपनियों को अनुपालन (Compliance) रिपोर्ट जमा करने के लिए अब 9 महीने का अतिरिक्त समय मिल गया है।
यह स्थगन न केवल आम उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधा लेकर आया है, बल्कि उन कंपनियों को भी बड़ी राहत दी है जो अपने मौजूदा आर्किटेक्चर को बदलने में तकनीकी चुनौतियों का सामना कर रही थीं। सरकार का यह कदम स्पष्ट करता है कि साइबर सुरक्षा प्राथमिकता तो है, लेकिन तकनीक की व्यावहारिक सीमाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब 31 दिसंबर तक व्हाट्सएप और टेलीग्राम अपने पुराने तरीके से ही काम करते रहेंगे। विभाग ने कंपनियों से उम्मीद जताई है कि वे इस अतिरिक्त समय का उपयोग सिम बाइंडिंग के तकनीकी समाधान खोजने और सुरक्षा खामियों को दूर करने में करेंगी, ताकि भविष्य में डिजिटल फ्रॉड के रास्ते पूरी तरह बंद किए जा सकें।
