भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह का आखिरी कारोबारी दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। चौतरफा बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में करीब 1.50 लाख करोड़ रुपये की भारी चपत लगी। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को पूरी तरह बिगाड़ दिया। शुक्रवार को सेंसेक्स 516 अंक टूटकर 77,328 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 150 अंकों की गिरावट के साथ 24,176 के स्तर पर आ गया।

SBI समेत दिग्गज शेयरों में भारी गिरावट
आज की गिरावट का सबसे बड़ा शिकार बैंकिंग सेक्टर, विशेषकर सरकारी बैंक रहे। देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक SBI के शेयरों में 6% से ज्यादा की गिरावट आई और यह 1019 रुपये पर बंद हुआ। इसके अलावा एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में भी करीब 2% की गिरावट देखी गई। पीएसयू बैंक इंडेक्स के साथ-साथ ऑयल एंड गैस और मेटल सेक्टर में भी भारी दबाव नजर आया।
बाजार में गिरावट के 5 प्रमुख कारण
ईरान-अमेरिका तनाव: सीजफायर की कोशिशों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य टकराव की खबरें आईं। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से ‘टोल वसूली’ के फैसले और उसे न खोलने की जिद ने भू-राजनीतिक चिंताएं बढ़ा दी हैं।
क्रूड ऑयल का झटका: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है, जिससे महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है।
कमजोर रुपया: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ऐतिहासिक गिरावट के साथ 94.305 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
खराब तिमाही नतीजे: कई बड़ी कंपनियों के तिमाही परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, जिससे निवेशकों ने बिकवाली को प्राथमिकता दी।
ग्लोबल संकेत: एशियाई और अमेरिकी बाजारों में छाई कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखा।
शुक्रवार को बीएसई पर ट्रेड हुए कुल 4,406 शेयरों में से 2,217 शेयर लाल निशान पर बंद हुए। हालांकि, इस भारी गिरावट के बीच भी 219 शेयरों ने अपने 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर को छुआ, लेकिन लार्ज कैप शेयरों में बिकवाली ने बाजार के ओवरऑल परफॉर्मेंस को खराब कर दिया।
