वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा कही जाने वाली ‘होर्मुज की खाड़ी’ एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। पिछले कुछ दिनों की अस्थायी शांति के बाद ईरान ने अचानक इस संकरे समुद्री रास्ते पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण लागू कर दिया है। तनाव उस समय चरम पर पहुँच गया जब खाड़ी से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी की खबरें सामने आईं। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने दो टूक शब्दों में ऐलान किया है कि अब किसी भी जहाज को इस रास्ते से गुजरने के लिए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना से लिखित अनुमति लेनी होगी। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में हड़कंप मचा दिया है।

ईरान के इस सख्त रुख के पीछे अमेरिका के साथ बढ़ता टकराव बताया जा रहा है। ईरान का आरोप है कि अमेरिकी नौसेना नाकेबंदी की आड़ में उनके बंदरगाहों पर अवैध गतिविधियाँ कर रही है। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने भी एक कड़ा संदेश जारी करते हुए चेतावनी दी है कि उनकी सेना दुश्मनों को ‘नई और कड़वी हार’ देने के लिए तैयार है। गौरतलब है कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी संकरे मार्ग से गुजरता है। ईरान द्वारा नाकेबंदी और फायरिंग की घटनाओं के बाद समुद्र में जहाजों की लंबी कतारें लग गई हैं, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई ठप होने और कीमतों के आसमान छूने का खतरा पैदा हो गया है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि 22 अप्रैल तक यानी युद्धविराम की अवधि खत्म होने से पहले कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो बड़ी सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। इजरायल और लेबनान के बीच हुए 10 दिनों के युद्धविराम के बाद उम्मीद जगी थी कि होर्मुज का रास्ता खुला रहेगा, लेकिन ईरान के ताजा फैसले ने शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। वर्तमान में खाड़ी में स्थिति बेहद विस्फोटक है और पूरी दुनिया की नजरें बुधवार की समयसीमा पर टिकी हैं। अगर कूटनीतिक प्रयास विफल रहे, तो मिडिल ईस्ट में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत हो सकती है।
