पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा कीमतों को स्थिर रखने के बीच, निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी शेल इंडिया (Shell India) ने 1 अप्रैल 2026 से अपने पेट्रोल और डीजल के दामों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर दी है। कर्नाटक के बेंगलुरु समेत देश के कई राज्यों में शेल के पंपों पर पेट्रोल 7.41 रुपये और डीजल की कीमतों में 25.01 रुपये प्रति लीटर का भारी इजाफा किया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद अब सामान्य डीजल की कीमत 123.52 रुपये और प्रीमियम वेरिएंट 133.52 रुपये प्रति लीटर तक पहुँच गया है।

निजी तेल कंपनियों के इस कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘ईरान युद्ध’ और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुआ सप्लाई संकट है। 8 फरवरी को जब से अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की है, तब से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 60 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। नायरा एनर्जी के बाद शेल इंडिया दूसरी ऐसी बड़ी निजी कंपनी है जिसने नुकसान की भरपाई के लिए कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डाला है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में डीजल की कीमतें 148 से 165 रुपये प्रति लीटर के खतरनाक स्तर तक पहुँच सकती हैं।
प्राइवेट रिटेलर्स का तर्क है कि सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, HPCL, BPCL) को सरकार से मुआवजा या सब्सिडी का समर्थन मिलता है, जिससे वे कच्चा तेल महंगा होने पर भी कीमतें स्थिर रख पाती हैं। इसके विपरीत, निजी कंपनियों को बाजार की वास्तविक दरों पर निर्भर रहना पड़ता है। वर्तमान में शेल इंडिया के गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और असम जैसे राज्यों में 325 से अधिक पंप हैं, जहाँ अब ईंधन भराना आम आदमी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत तेल आयात करता है, ऐसे में वैश्विक युद्ध की हर एक चिंगारी सीधे तौर पर भारतीय परिवहन और अर्थव्यवस्था को झुलसा रही है।
