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NCERT पुस्तक विवाद पर पीएम मोदी सख्त, कहा – ‘बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा, इसका ध्यान रखना चाहिए’

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी National Council of Educational Research and Training की आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक को लेकर उपजा विवाद अब केंद्र सरकार के उच्च स्तर तक पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर नाराजगी जताई और कहा कि बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा है, इस पर विशेष सतर्कता बरती जानी चाहिए।

बताया जाता है कि बैठक में प्रधानमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि पाठ्यक्रम की सामग्री जिम्मेदारी के साथ तैयार होनी चाहिए। इस बैठक के बाद ही वह अपने इजरायल दौरे पर रवाना हुए थे। अब उनके लौटने के बाद इस मामले में ठोस कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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विवाद उस अध्याय को लेकर खड़ा हुआ जिसमें न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों जैसे भ्रष्टाचार, लंबित मामलों और जजों की कमी का उल्लेख किया गया था। इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए Supreme Court of India ने कहा कि पाठ्यपुस्तक की भाषा से न्यायिक संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचती है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पुस्तक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया और सभी प्रतियों को जब्त करने के साथ डिजिटल संस्करण हटाने के निर्देश दिए।

पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल थे। अदालत ने एनसीईआरटी के निदेशक और विद्यालय शिक्षा विभाग के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो कुछ हुआ वह दुखद है और न्यायपालिका का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की जांच होगी और अध्याय तैयार करने में शामिल लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जैसे ही विवाद सामने आया, संबंधित पुस्तकों का वितरण रोक दिया गया।

सरकार का कहना है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में न्यायपालिका सर्वोच्च है और उसका सम्मान सर्वोपरि है। सूत्रों के मुताबिक, विवादास्पद अंशों को लेकर सरकार बेहद गंभीर है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए पाठ्यक्रम समीक्षा की प्रक्रिया को और सख्त किया जा सकता है।

इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम निर्माण और संस्थागत जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों की सामग्री तैयार करते समय संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और संतुलित प्रस्तुति का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

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