पश्चिम एशिया में एक महीने से जारी भीषण रक्तपात और वैश्विक अस्थिरता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहली बार युद्ध समाप्ति के स्पष्ट संकेत दिए हैं। ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ को दिए एक विशेष टेलीफोनिक इंटरव्यू में ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान ने ईरान की आक्रमण क्षमता को लगभग ‘नष्ट’ कर दिया है और अब यह संघर्ष अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया ईंधन संकट और आर्थिक मंदी के मुहाने पर खड़ी है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि अमेरिकी सेना की वापसी के साथ ही ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोल दिया जाएगा, जिससे वैश्विक व्यापार पटरी पर लौट सकेगा।

हालाँकि, राष्ट्रपति ट्रम्प ने जहाँ एक ओर ‘विनाश’ और ‘पूर्ण नियंत्रण’ की बात की, वहीं दूसरी ओर उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान की बची-कुची सैन्य शक्ति को पूरी तरह बेअसर करने के लिए अभी कुछ और ‘काम’ बाकी है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “हम वहाँ ज्यादा समय तक नहीं रहेंगे, लेकिन हम उन्हें अभी पूरी तरह से तबाह कर रहे हैं।” दिलचस्प बात यह है कि ट्रम्प अब युद्ध को खत्म करने के लिए अपने रुख में लचीलापन दिखाने के संकेत भी दे रहे हैं। कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि अमेरिकी प्रशासन बिना किसी पूर्व शर्त के भी युद्ध विराम पर विचार कर सकता है, जो ट्रम्प की पुरानी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति से बिल्कुल अलग नजर आता है।
दूसरी ओर, तेहरान का रुख अभी भी कड़ा बना हुआ है। ईरान ने अमेरिका के इन दावों और नरम पड़ते संकेतों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि युद्ध का अंत केवल उसकी शर्तों पर ही होगा। फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए इस संघर्ष ने अब तक हजारों लोगों की जान ले ली है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प का यह बयान घरेलू दबाव और वैश्विक तेल आपूर्ति को बहाल करने की मजबूरी का परिणाम हो सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह ‘जल्द खत्म होने वाला युद्ध’ वाकई शांति की ओर बढ़ेगा या ईरान का पलटवार इस आग को और भड़काएगा।
