भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी व्यापार वार्ताओं ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जल्द ही इस पर औपचारिक मुहर लगने की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिका के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट Christopher Landau ने संकेत दिया है कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित Raisina Dialogue के दौरान उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उनके अनुसार यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि ऊर्जा, तकनीक और सुरक्षा जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग को भी बढ़ावा देगा।

लैंडाउ ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच साझा रणनीतिक हित मौजूद हैं। वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा ऐसे मुद्दे हैं जिन पर भारत और अमेरिका लंबे समय से साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और गहरी हो सकती है, जिससे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
ऊर्जा क्षेत्र को लेकर भी अमेरिका ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा जाहिर की है। अमेरिका दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों में से एक है और वह भारत को तेल, गैस और अन्य ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए यह साझेदारी भविष्य में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
फरवरी में दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा पर सहमति जताई थी। इसके तहत कई उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने और व्यापारिक बाधाओं को घटाने पर चर्चा हुई थी। प्रस्तावित समझौते के अनुसार अमेरिका ने कुछ भारतीय उत्पादों पर लगाए गए जवाबी टैरिफ को कम करने का संकेत दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिल सकती है।
इसके अलावा भारत भी अमेरिका से बड़े पैमाने पर ऊर्जा संसाधन, विमानन उपकरण, तकनीकी उत्पाद और औद्योगिक कच्चा माल खरीदने की योजना बना रहा है। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह व्यापारिक सहयोग सैकड़ों अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है।
हालांकि समझौते के अंतिम कानूनी मसौदे को तैयार करने की प्रक्रिया अभी जारी है और इसके लिए प्रस्तावित बैठक को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। फिर भी दोनों देशों के अधिकारी आशावादी हैं कि जल्द ही इस ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा।
