मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच गाजा को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय शांति पहल आकार लेती दिख रही है, जिसमें भारत की भूमिका अहम मानी जा रही है। अमेरिकी नेतृत्व में गठित एक नए बहुपक्षीय मंच में भारत को शामिल किए जाने की संभावना ने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। माना जा रहा है कि यह पहल गाजा में स्थिरता, पुनर्निर्माण और भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक नया ढांचा पेश कर सकती है।

सूत्रों के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय मंच का मकसद केवल संघर्षविराम तक सीमित नहीं है, बल्कि गाजा में मानवीय हालात सुधारने, बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने और स्थानीय प्रशासन को तकनीकी सहयोग देने पर भी जोर है। भारत की छवि एक संतुलित और जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभरी है, यही वजह है कि उसे इस पहल में एक भरोसेमंद भागीदार के तौर पर देखा जा रहा है।

राजनयिक जानकारों का कहना है कि अगर भारत इस मंच में सक्रिय भागीदारी करता है, तो यह पश्चिम एशिया में उसकी विदेश नीति को नई दिशा दे सकता है। भारत पहले भी फिलिस्तीन मुद्दे पर मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण के पक्ष में रहा है, साथ ही उसने इज़रायल और अरब देशों दोनों के साथ अपने संबंध संतुलित रखे हैं।
इस पहल में अमेरिका के साथ-साथ यूरोप और अरब जगत के कई प्रभावशाली देशों की भागीदारी की बात सामने आ रही है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बैठकों और मंचों पर गाजा के भविष्य को लेकर व्यापक मंथन होने की उम्मीद है। ऐसे में भारत की भागीदारी न केवल क्षेत्रीय शांति प्रयासों को मजबूती दे सकती है, बल्कि उसे वैश्विक शांति प्रक्रियाओं में एक निर्णायक आवाज भी दिला सकती है।
