अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ा दी है, लेकिन भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल पूरी तरह मजबूत स्थिति में है। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत के पास पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का करीब 50 दिनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने में कोई कठिनाई नहीं आएगी।
ऊर्जा मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि भारत अपनी तेल आपूर्ति के लिए कई देशों और समुद्री मार्गों पर निर्भर है, इसलिए किसी एक मार्ग में बाधा आने से देश की कुल सप्लाई पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। भारत की कुल क्रूड ऑयल आपूर्ति का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ही स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से होकर आता है, जबकि बाकी आपूर्ति अन्य अंतरराष्ट्रीय स्रोतों और वैकल्पिक रास्तों से सुनिश्चित की जाती है।

हाल के दिनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन सरकार का कहना है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इसका तत्काल प्रभाव पड़ने की संभावना कम है। पिछले कुछ वर्षों में घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए गए हैं, जिनका असर अब भी दिखाई दे रहा है।
सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार रूस, मध्य पूर्व और अन्य प्रमुख ऊर्जा निर्यातक देशों के साथ संपर्क में है ताकि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों और साझेदार देशों के साथ समन्वय भी बनाए रखा जा रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार रोजाना दो बार ऊर्जा आपूर्ति की समीक्षा कर रही है। इन बैठकों में सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी और ऊर्जा विशेषज्ञ शामिल होते हैं। जरूरत पड़ने पर औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए गैस आवंटन में बदलाव करने की भी योजना तैयार रखी गई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उर्वरकों की उपलब्धता पर भी किसी प्रकार का संकट नहीं आएगा और किसानों को आवश्यक संसाधन समय पर मिलते रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और भंडारण क्षमता बढ़ाने पर काफी ध्यान दिया है, जिसका फायदा मौजूदा परिस्थितियों में मिल रहा है।
