भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 23 अप्रैल 2026 की तारीख एक नए कीर्तिमान के रूप में दर्ज हो गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर 91.78 प्रतिशत का अविश्वसनीय मतदान दर्ज किया गया, जिसने 2011 के 84% के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। वहीं, तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर हुए एकतरफा चुनाव में भी 84.35% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर नया रिकॉर्ड कायम किया। भीषण गर्मी और छिटपुट हिंसा की खबरों के बावजूद मतदाताओं के इस भारी उत्साह ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है।

बंगाल के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो दक्षिण दिनाजपुर में सबसे अधिक 93% से ज्यादा वोटिंग हुई, जबकि कूच बिहार में यह आंकड़ा 92% के पार रहा। दार्जिलिंग और अलीपुरद्वार जैसे पहाड़ी व तराई क्षेत्रों में भी बंपर मतदान हुआ। हालांकि, रिकॉर्ड वोटिंग के बीच बीरभूम के खैराशोल में भारी तनाव देखा गया, जहाँ ग्रामीणों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई। स्थानीय लोगों ने ईवीएम में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि वोट एक खास दल के पक्ष में जा रहे थे, जिसके बाद कई बूथों पर प्रदर्शन हुए। बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस भारी मतदान को ‘बदलाव की हवा’ करार देते हुए अपनी जीत का दावा किया है।
तमिलनाडु में भी 1952 के बाद से अब तक का सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया है। यहाँ चुनाव आयोग द्वारा किए गए मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) का असर साफ देखने को मिला। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, फिल्म सितारों और उद्योगपतियों सहित आम जनता सुबह से ही लंबी कतारों में खड़ी नजर आई। बंगाल में अब दूसरे चरण की 142 सीटों के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा, जहाँ 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर होगी। 4 मई को होने वाली मतगणना से ही साफ हो पाएगा कि इस रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग ने सत्ता की कुर्सी किसे सौंपी है।
