संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर छिड़ी बहस के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा सीटों के भविष्य का एक ऐसा खाका पेश किया है, जिसने विपक्ष की ‘दक्षिण बनाम उत्तर’ की राजनीति पर विराम लगाने की कोशिश की है। विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कि परिसीमन से दक्षिण भारत की राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी, शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना बना रही है। उन्होंने तर्क दिया कि सीटों में 50 प्रतिशत की यह बढ़ोतरी इसलिए जरूरी है ताकि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के बाद भी पुरुषों की मौजूदा सीटों की संख्या प्रभावित न हो।

अमित शाह ने डेटा के जरिए समझाया कि कैसे नई व्यवस्था में दक्षिण भारतीय राज्यों की हिस्सेदारी घटने के बजाय बढ़ेगी। उनके द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में दक्षिण भारत के पांच राज्यों (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) के कुल 129 सांसद हैं, जो सदन में 23.76% की हिस्सेदारी रखते हैं। नई 816 सदस्यीय लोकसभा में इन राज्यों के सांसदों की संख्या बढ़कर 195 हो जाएगी, जिससे उनकी हिस्सेदारी मामूली रूप से बढ़कर 23.97% हो जाएगी। शाह ने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए बताया कि राज्य की सीटें 39 से बढ़कर 59 हो जाएंगी, जिससे उसकी संसदीय ताकत में कोई कमी नहीं आएगी।
इस ऐतिहासिक बदलाव को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार को संसद में ‘विशेष बहुमत’ की आवश्यकता होगी। गणित यह है कि लोकसभा में इस विधेयक को पास कराने के लिए 360 मतों की जरूरत है, जबकि एनडीए के पास फिलहाल 293 सदस्य हैं। यानी सरकार को 67 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की दरकार है। गृह मंत्री ने विपक्षी दलों से अपील की कि वे क्षेत्रीय राजनीति से ऊपर उठकर इस महिला सशक्तिकरण के महायज्ञ में अपना सहयोग दें। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया वैज्ञानिक होगी और यह सुनिश्चित करेगी कि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले प्रगतिशील राज्यों को सजा मिलने के बजाय उनकी हिस्सेदारी सुरक्षित रहे।
