पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सियासी किला पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। बंगाल में 15 साल पुरानी सत्ता गंवाने और पार्टी के भीतर मची भगदड़ के बीच अब ‘दीदी’ को एक बार फिर विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन की याद सताने लगी है। अपनी खोई हुई राजनीतिक साख को बचाने और राष्ट्रीय स्तर पर वजूद बनाए रखने के लिए ममता बनर्जी सोमवार को नई दिल्ली में होने वाली ‘INDIA’ गठबंधन की महाबैठक में हिस्सा लेने पहुंच रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ममता बनर्जी इस बैठक के जरिए न सिर्फ राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती हैं, बल्कि अपनी ही पार्टी के अंदर कमजोर हो रही स्थिति को भी मजबूत करना चाहती हैं।

8 जून को दिल्ली में जुट रहा है विपक्ष, अभिषेक बनर्जी पहले से मौजूद
विपक्षी दलों की यह महत्वपूर्ण बैठक 8 जून को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली है। इस बैठक में शामिल होने के लिए टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी रविवार को दिल्ली पहुंच रही हैं और उनके मंगलवार तक राजधानी में रुकने का अनुमान है। वहीं, उनके भतीजे और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। ममता बनर्जी की यह दिल्ली यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त देकर बंगाल के इतिहास में पहली बार सत्ता हासिल की है और टीएमसी पूरी तरह बैकफुट पर है।
सोनिया गांधी से मुलाकात की कोशिश, पर राह आसान नहीं
सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी दिल्ली में अपनी व्यस्तताओं के दौरान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात के मौके भी तलाश रही हैं। हालांकि, गांधी परिवार की तरफ से अभी तक इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में गठबंधन के नेतृत्व को लेकर टीएमसी और कांग्रेस के बीच कड़वाहट काफी बढ़ गई थी, जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस को दरकिनार कर खुद फ्रंटफुट पर आने की कोशिश की थी।
कांग्रेस के बदले सुर: ‘बुरे वक्त में साथ तो देंगे, पर करीबी दोस्त नहीं रहेंगे’
ममता बनर्जी के इस बदले रुख पर कांग्रेस के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बंगाल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “जब ममता बनर्जी बंगाल में जीत रही थीं, तो उन्होंने राहुल गांधी की कटु आलोचना की थी और कांग्रेस नेतृत्व से गठबंधन की कमान छीनने की कोशिश की थी। अब जब उनका खराब समय आया है, तो कांग्रेस उन्हें गठबंधन से बाहर तो नहीं करेगी, लेकिन हम उनके साथ पहले जैसे करीबी दोस्तों की तरह भी पेश नहीं आ सकते।”
पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव, अभिषेक का दायरा घटा?
बंगाल में हार के बाद टीएमसी के भीतर भी असंतोष की आवाजें उठने लगी हैं। अभिषेक बनर्जी को लेकर बढ़ रही आंतरिक आलोचना को देखते हुए ममता बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में बड़े बदलाव किए हैं। हालांकि अभिषेक बनर्जी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद पर बने हुए हैं, लेकिन अब डिसीजन मेकिंग (फैसला लेने) के दायरे को बढ़ाने के लिए दो अन्य संयुक्त राष्ट्रीय महासचिवों की नियुक्ति की गई है, जिनमें राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन और डोना सेन शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस कदम के जरिए ममता ने पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध को शांत करने की कोशिश की है।
