प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और विग्रह प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ को संबोधित किया। इस भव्य समारोह में पीएम मोदी ने भारत की अटूट राजनीतिक इच्छाशक्ति और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए वैश्विक ताकतों को कड़ा संदेश दिया।

परमाणु शक्ति और अटल इरादे
पीएम मोदी ने 11 मई, 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण को याद करते हुए कहा कि आज का दिन भारत के सामर्थ्य का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “जब 11 मई को परीक्षण हुआ, तो पूरी दुनिया भारत के खिलाफ खड़ी हो गई थी। तमाम आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए और भारत को दबोचने की कोशिश हुई, लेकिन अटल जी के नेतृत्व में 13 मई को दो और परीक्षण कर भारत ने दिखा दिया कि उसे कोई ताकत दबा नहीं सकती।” उन्होंने जोर दिया कि भारत हमेशा ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ता रहेगा।
सोमनाथ: अविनाशी चेतना का उद्घोष
मंदिर के इतिहास पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महमूद गजनवी और अलाउद्दीन खिलजी जैसे कई आक्रांताओं ने सोमनाथ के वैभव को मिटाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा, “लुटेरे सोमनाथ को केवल एक भौतिक ढांचा मानकर टकराते रहे, उन्हें नहीं पता था कि भारत की आत्मा अविनाशी है।” पीएम मोदी के अनुसार, 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा भारत की स्वतंत्र चेतना का जयघोष था।
शिव की क्रीड़ा और अमृत यात्रा
पीएम मोदी ने सोमनाथ को ‘स्वाभिमान पर्व’ और ‘अमृत यात्रा’ का संगम बताया। उन्होंने कहा कि महादेव का साक्षात्कार और सागर की लहरों का जयघोष ऐसा अहसास करा रहा है जैसे पूरी सृष्टि ‘जय सोमनाथ’ बोल रही है। उन्होंने कहा कि जो हलाहल पीकर नीलकंठ हो गए, उन्हीं की शरण में आज हम इस आधुनिक स्वरूप के 75 वर्ष मना रहे हैं।
