दिल्ली और पंजाब की राजनीति में आज उस समय बड़ा भूकंप आ गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के संस्थापक सदस्य और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने पद से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। भाजपा मुख्यालय में नितिन नवीन की मौजूदगी में राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने आधिकारिक तौर पर पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान राघव चड्ढा ने एक बेहद चुटीली टिप्पणी करते हुए कहा कि वे अब तक “गलत पार्टी में सही आदमी” थे और ‘आप’ अब अपने बुनियादी सिद्धांतों और नैतिकता से पूरी तरह भटक चुकी है।

यह केवल एक नेता का इस्तीफा नहीं है, बल्कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के संसदीय दल का विभाजन है। राघव चड्ढा ने दावा किया है कि राज्यसभा में ‘आप’ के 10 में से दो-तिहाई से ज्यादा सांसद उनके साथ हैं। हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी जैसे बड़े नामों के बागी गुट में शामिल होने के दावों के साथ, अब राज्यसभा में अरविंद केजरीवाल की ताकत सिमटकर केवल 3 सांसदों (संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सिच्चेवाल) तक रह गई है। चड्ढा ने स्पष्ट किया कि वे संविधान के प्रावधानों के तहत अपने गुट का विलय भाजपा में कर रहे हैं।
इस बगावत की पटकथा दिल्ली चुनाव में पार्टी की हार के बाद से ही लिखी जाने लगी थी। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के रणनीतिकार रहे संदीप पाठक को हाशिए पर धकेलना और उन्हें छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों तक सीमित करना इस असंतोष की बड़ी वजह बना। राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जवानी के 15 साल जिस पार्टी को सींचने में दिए, वह अब केवल निजी हितों के लिए काम कर रही है। भाजपा में शामिल होने के बाद नितिन नवीन ने मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया, जिससे यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में दिल्ली और पंजाब की सियासत में ‘आप’ के लिए चुनौतियां और बढ़ने वाली हैं।
