आम आदमी पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक राघव चड्ढा के पार्टी छोड़ने के चौंकाने वाले फैसले ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बड़े घटनाक्रम पर ‘आप’ संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपनी पहली और तीखी प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को निशाने पर लेते हुए इसे पंजाब की अस्मिता से जोड़ दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर केवल एक लाइन लिखते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की— “बीजेपी ने फिर से पंजाबियों के साथ किया धक्का।” केजरीवाल का यह बयान स्पष्ट रूप से संकेत दे रहा है कि पार्टी राघव के जाने के पीछे भाजपा का हाथ देख रही है।

इस मुद्दे पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी मोर्चा खोल दिया है। मान ने भाजपा पर ‘तिकड़मबाजी’ का आरोप लगाते हुए कहा कि जो पार्टी सीधे चुनाव नहीं जीत पाती, वह अब पिछले दरवाजे से पंजाब की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आर्थिक दबाव बनाने और आरटीएफ (RTF) का पैसा रोकने जैसे गंभीर आरोप लगाए। मान ने भाजपा की कार्यशैली की तुलना ‘वॉशिंग मशीन’ से करते हुए कहा कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे की पार्टियों के साथ जो पैटर्न अपनाया गया, वही अब पंजाब में दोहराने की कोशिश हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा पंजाब के विकास और वहां की ऊर्जा को कमजोर करना चाहती है।
दूसरी ओर, राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इसे भाजपा की ‘घटिया राजनीति’ करार दिया है। सिंह ने आरोप लगाया कि दिल्ली और पंजाब में जनहित के कामों को रोकने के लिए साजिश रची जा रही है और राघव चड्ढा का पार्टी छोड़ना इसी बड़ी पटकथा का हिस्सा है। राघव चड्ढा, जिन्हें केजरीवाल का बेहद करीबी और पार्टी का थिंक-टैंक माना जाता था, उनके जाने से ‘आप’ के लिए एक बड़ा वैक्यूम पैदा हो गया है। फिलहाल, भाजपा ने इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इस इस्तीफे ने आगामी चुनावों से पहले पंजाब और दिल्ली की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है।
