अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीन दिवसीय चीन यात्रा (13-15 मई, 2026) के दौरान एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद ट्रंप ने दावा किया है कि चीन अब ईरान को सैन्य उपकरणों और हथियारों की आपूर्ति नहीं करेगा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान के साथ युद्ध की आशंकाओं के बीच इस दावे को वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सैन्य उपकरणों पर रोक, पर तेल खरीद जारी
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता में ईरान के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। ट्रंप के अनुसार, जिनपिंग ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान को सैन्य उपकरण नहीं देंगे, जिसे ट्रंप ने एक ‘बहुत बड़ा बयान’ करार दिया। हालांकि, चीन ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान से तेल खरीदना जारी रखेगा। आंकड़ों के मुताबिक, चीन ईरान के कुल तेल निर्यात का 90% से अधिक हिस्सा खरीदता है, जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा की तरह है।
बोइंग के लिए ‘महा-डील’ और व्यापारिक रिश्ते
ट्रंप ने अपनी इस यात्रा के दौरान एक बड़ी व्यापारिक सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि चीन अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग को 200 बड़े विमानों का ऑर्डर देने पर सहमत हो गया है। यह डील अमेरिका में हजारों नौकरियां पैदा करने की क्षमता रखती है। बोइंग के सीईओ केली ऑर्टबर्ग भी इस दौरे पर ट्रंप के साथ मौजूद हैं।
पुराने टैरिफ और भविष्य की राह
व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेताओं ने चीन द्वारा अमेरिका से तेल खरीदने के मुद्दे पर भी बातचीत की। गौरतलब है कि ट्रेड वॉर के दौरान मई 2025 में चीन ने अमेरिकी क्रूड ऑयल पर 20% टैरिफ लगाकर खरीद बंद कर दी थी। अब इन मुलाकातों के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सामरिक रिश्तों में नए समीकरण बनने की उम्मीद जताई जा रही है।
