पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक विद्रोह और राजनीतिक भूचाल से गुजर रही है। सोमवार को पार्टी के सबसे वरिष्ठ चेहरों में से एक और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने अचानक पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया। इस अप्रत्याशित कदम के तुरंत बाद दिल्ली से लेकर कोलकाता तक की राजनीति में हड़कंप मच गया है। अब खबर है कि टीएमसी के करीब 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला को पत्र सौंपकर संसद में एक अलग संसदीय दल (ब्लॉक) के रूप में मान्यता देने और एनडीए (NDA) गठबंधन में शामिल होने की आधिकारिक इच्छा जाहिर की है।
शुभेंदु अधिकारी से मिले 14 लोकसभा सांसद, दिल्ली में बढ़ी हलचल
सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के तुरंत बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में टीएमसी के करीब 14 बागी लोकसभा सांसदों ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से एक बेहद गोपनीय और अहम मुलाकात की। इस सियासी बैठक के बाद बागी सांसदों का समूह लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के पास पहुंचा। उन्होंने स्पीकर को सौंपे पत्र में मांग की है कि चूंकि वे अब पार्टी नेतृत्व के फैसलों से सहमत नहीं हैं, इसलिए लोकसभा में उनके समूह को एक अलग संसदीय ब्लॉक का दर्जा दिया जाए और उसी के अनुरूप सदन में अलग सीटों का आवंटन किया जाए। सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा गुट अब केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बनने की तैयारी कर रहा है।

सुखेंदु शेखर रॉय के साथ दिखे कई बड़े चेहरे
राज्यसभा में पिछले एक दशक से अधिक समय से टीएमसी का सबसे मजबूत और प्रखर चेहरा रहे सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के तुरंत बाद एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर सामने आई है। इस तस्वीर में टीएमसी के कम से कम पांच अन्य सांसद उनके साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस बगावत को हवा देने वालों में डॉ. शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व), प्रसून बनर्जी (हावड़ा), जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार), कालिपद सोरेन (झारग्राम) और अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा) जैसे कद्दावर सांसद शामिल हैं।
विधानसभा के बाद अब संसद में बगावत, ऋतब्रत बनर्जी बने थे वजह
सांसदों का यह विद्रोह पश्चिम बंगाल विधानसभा में हुए तख्तापलट के महज कुछ ही दिनों बाद आया है। हाल ही में बंगाल विधानसभा के भीतर टीएमसी के 58 विधायकों ने ममता बनर्जी और आलाकमान के खिलाफ खुली बगावत कर दी थी। इन विधायकों ने आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम को खारिज करते हुए ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया था, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में मान्यता दे दी थी। विधानसभा के बाद अब संसद में लगी यह आग साफ दर्शाती है कि चुनावी हार के बाद टीएमसी के भीतर की दरारें अब नियंत्रण से बाहर हो चुकी हैं।
शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नए सियासी समीकरण, ममता खेमे में सन्नाटा
राजनीतिक गलियारों में इस बात की अटकलें तेज हैं कि पश्चिम बंगाल की राजनीति अब एक नए युग की तरफ बढ़ रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में एक नई राजनीतिक ताकत उभर रही है, जो टीएमसी के सभी असंतुष्ट और उपेक्षित नेताओं को अपने पाले में एकजुट करने में जुटी है। यदि ये 20 सांसद आधिकारिक रूप से पाला बदल लेते हैं, तो संसद के निचले और ऊपरी सदन में टीएमसी का वजूद बेहद कमजोर हो जाएगा।
इस पूरे सियासी बवंडर और ऐतिहासिक टूट पर फिलहाल ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी या टीएमसी आलाकमान की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ‘दीदी’ इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से देख रही हैं और जल्द ही बागियों पर बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का फैसला ले सकती हैं।
