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राघोपुर में गजब का संग्राम ! क्या तेजस्वी यादव 3 यादव और एक राजपूत उम्मीदवार के चक्रव्यूह में फंसे ?

राघोपुर में सबसे ज्यादा वोटर राजपूत ही हैं. ऐसे में देखना होगा कि 30 प्रतिशत यादव जाति वाले राघोपुर के रण में जीत किसकी होती है,

चुनावी बिसात पर कौन अपना और कौन पराया? यहां तो बाजी वही जीतता है, जिसकी चाल सटीक हो. जी हां, बिहार के सियासत की धुरी बन चुके नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को उनके घर में ही पटखनी देने का फूल प्रूफ प्लान तैयार हो चुका है और जिस राघोपुर से जीत की हैट्रिक लगा कर तेजस्वी बिहार की गद्दी हासिल करने का सपना देख रहे हैं, उस सपने को चकनाचूर करने की तैयारी हो चुकी है. तेजस्वी की घेराबंदी करने वाले योद्धाओं में सबसे पहला नाम तेजस्वी के बड़े भाई यानी तेज प्रताप यादव का आता है. तेज प्रताप ने तेजस्वी के खिलाफ अपने धुरंधर को मैदान में उतार दिया है. सबसे अहम यह है कि जिस सेनापति को तेज प्रताप ने तेजस्वी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा वह प्रेम कुमार पहले राजद के ही सेनापति रह चुके हैं.

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प्रेम की शिक्षा और जायदाद
प्रेम कुमार की 10वीं और 12वीं बिहार बोर्ड से हुई है. ग्रेजुएशन दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया है. इसके बाद हरियाणा के हिसार से पत्रकारिता में MA और महाराष्ट्र के वर्धा से इतिहास में MA कर डबल MA बन चुके हैं. यही नहीं इसके बाद LLB पाटलीपुत्र यूनिवर्सिटी भी कर लिया. इनके पास 9 लाख 70 हजार रुपये का बैंक बैलेंस और लगभग 18 लाख रुपये के जेवरात है और लगभग एक बीघा जमीन के मालिक हैं.

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यादव जाति से आने वाले प्रेम कुमार राघोपुर विधानसभा के चकसिकंदर के रहने वाले हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति में हैं और रामविलास पासवान के समय छात्र लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इसके बाद 2015 में तेजस्वी की पहली चुनावी सभा में लालू यादव के कहने पर राजद का हाथ थाम लिया और तेजस्वी की जीत में अहम भूमिका निभाई, लेकिन पार्टी में उतनी रिस्पेक्ट पिछले 10 सालों में नहीं मिली तो पार्टी से अलग हुए. लालू के बड़े लाल तेज प्रताप की टीम में आ गए तेजस्वी के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं.

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बीजेपी उम्मीदवार सतीश यादव
राघोपुर से बीजेपी ने सतीश यादव को उम्मीदवार बनाया गया है. सतीश कुमार यादव राघोपुर विधानसभा के दियारा क्षेत्र स्थित श्यामचंद रामपुर गांव के रहने वाले हैं. सतीश कुमार यादव ‘यदुवंशी’ समुदाय से आते हैं और बिहार की राजनीति में एक प्रमुख चेहरे के रूप में जाने जाते हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत RJD से की थी, लेकिन 2005 में वह नीतीश कुमार JDU में शामिल हो गए. 2005 में राघोपुर सीट से उनका पहला चुनाव खत्म तो हार से हुआ, लेकिन 2010 में उन्होंने RJD की दिग्गज नेता राबड़ी देवी को 13,006 वोटों के बड़े अंतर से हराकर राजनीतिक उलटफेर कर दिया था। उस चुनाव में सतीश कुमार ने 64,222 वोट हासिल किए थे, जबकि राबड़ी देवी को 51,216 वोट मिले थे. हालांकि 2015 में वो तेजस्वी से हार गए. 2015 में यह सीट बीजेपी के खाते में गई थी उस वक्त नीतीश कुमार महागठबंधन के साथ थे तो सतीश कुमार जेडीयू छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. इस क्षेत्र से चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे. 2020 में भी बीजेपी ने इन्हें मौका दिया लेकिन जीत नहीं पाए थे.

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चंचल सिंह को प्रशांत किशोर ने उतारा
जन सुराज पार्टी ने तेजस्वी यादव के खिलाफ चंचल सिंह को उम्मीदवार बनाया है. 37 वर्षीय चंचल सिंह राजपूत समुदाय से आते हैं और जेडीयू के व्यापारिक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव रह चुके हैं. वे पेशे से व्यवसायी हैं और होटल व रियल एस्टेट के क्षेत्र में एक्टिव हैं. चंचल सिंह ने जेडीयू की कई रैलियों में संयोजक की भूमिका निभाई थी.उन्होंने नमामी गंगे प्रोजेक्ट के तहत सोनपुर और सिमरिया घाट के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा, हाजीपुर और विदुपुर में उनके कई व्यावसायिक और आवासीय प्रोजेक्ट हैं. नई दिल्ली में भी उनका होटल व्यवसाय फैला हुआ है.

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कैसे फंसा चुनाव
राघोपुर में तीन यादव और एक राजपूत उम्मीदवार हैं. यादवों के बाद सबसे ज्यादा वोटर राजपूत ही हैं. अगर ये एकतरफा गए तो प्रशांत किशोर की पार्टी भी चमत्कार कर सकती है. अगर यादव वोट बीजेपी की तरफ थोड़ा भी बंटा और राजपूतो, ब्राह्मणों और दलितों ने साथ दिया तो बीजेपी सीट निकाल सकती है. वहीं तेजस्वी के साथ ही तेज प्रताप के उम्मीदवार को लेकर भी राघोपुर में काफी माहौल है. इस बार वजीर को मात देने के लिए सियासत के कई महारथी अपनी-अपनी चाल चल रहे हैं. ऐसे में देखना होगा कि 30 प्रतिशत यादव जाति वाले राघोपुर के रण में जीत किसकी होती है, लेकिन इतना तो तय है कि राघोपुर के युवराज की जिस तरीके से घेराबंदी हुई है, उससे निकल पाना लालू के युवराज के लिए आसान नहीं होगा.

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