NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘टेलीग्राम’ पर लगी अस्थायी पाबंदियों को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर रहे कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) मल्लिकार्जुन खरगे की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के छह सांसदों ने संयुक्त रूप से खरगे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस (Breach of Privilege Notice) दिया है। इस गंभीर शिकायत का संज्ञान लेते हुए राज्यसभा के सभापति और उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मामले को तत्काल जांच और रिपोर्ट के लिए विशेषाधिकार समिति (Privileges Committee) के पास भेज दिया है।

नियम 188 के तहत छह भाजपा सांसदों ने दी चुनौती
राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, भाजपा सांसद बृजलाल, मिथिलेश कुमार, सुमित्रा वाल्मिकी, शिवेश कुमार, सिकंदर कुमार और नागेंद्र राय ने संयुक्त रूप से राज्यसभा कामकाज नियमावली के नियम 188 के तहत यह नोटिस सौंपा है। सांसदों का आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष खरगे ने उच्च सदन के भीतर प्रधानमंत्री के पद और गरिमा को जानबूझकर ठेस पहुंचाई है, जो संसदीय परंपराओं के बिल्कुल खिलाफ है।
राज्यसभा सचिवालय ने दी मंजूरी, उपसभापति हरिवंश करेंगे जांच
राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, तथ्यों पर विचार करने के बाद सदन के सभापति ने 16 जून 2026 को नियम 203 के तहत इस मामले को विस्तृत जांच-पड़ताल के लिए विशेषाधिकार समिति को रेफर कर दिया है। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश इस उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष हैं। इस समिति में सुधांशु त्रिवेदी, दीपक प्रकाश, सुमेर सिंह सोलंकी, सुरेंद्र सिंह नागर, मनन कुमार मिश्रा (सभी भाजपा) और निर्दलीय सांसद कार्तिकेय शर्मा शामिल हैं, जो मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सभापति को सौंपेंगे।
विवाद की जड़: ‘टेलीग्राम बैन’ और नीट-यूजी 2026 री-एग्जाम पर खरगे के तीखे बोल
यह पूरा सियासी घमासान मंगलवार को तब शुरू हुआ जब मल्लिकार्जुन खरगे ने NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा (Re-exam) से ठीक पहले सरकार द्वारा टेलीग्राम का एक्सेस अस्थायी रूप से ब्लॉक करने और मैसेज-एडिटिंग फीचर बंद करने के फैसले की तीखी आलोचना की। सरकार का तर्क था कि ऐसा लीक मटीरियल को फैलने से रोकने के लिए किया गया है। लेकिन खरगे ने इसे सरकार की नाकामी छिपाने का जरिया बताया।
खरगे ने सरकार को घेरते हुए कहा था, भारतीय वायु सेना का इस्तेमाल करना, टेलीग्राम को ब्लॉक करना या छोटे-मोटे आरोपियों पर कार्रवाई करना केवल असली पेपर लीक माफिया को बचाने का प्रयास है। मोदी सरकार पिछले 10 वर्षों में हुई लगभग 90 पेपर लीक की घटनाओं को छिपा रही है, जिसने देश के करीब 9 करोड़ युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। खरगे ने मांग की थी कि नीट (NEET), एसएससी (SSC), यूजीसी नेट (UGC NET), सीबीएसई (CBSE) और यूपीएससी (UPSC) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की साख बचाने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
अब आगे क्या होगा? (What will happen next?)
समिति की जांच: उपसभापति हरिवंश की अध्यक्षता वाली विशेषाधिकार समिति अब मल्लिकार्जुन खरगे के सदन में दिए गए बयानों के वीडियो फुटेज और लिखित दस्तावेजों की समीक्षा करेगी।
पक्ष रखने का मौका: प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत समिति मल्लिकार्जुन खरगे को भी अपना पक्ष या स्पष्टीकरण रखने का पूरा मौका देगी।
कार्रवाई की सिफारिश: यदि समिति को लगता है कि खरगे के बयान से वास्तव में सदन या प्रधानमंत्री के विशेषाधिकार और गरिमा का हनन हुआ है, तो वह उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव, चेतावनी या एक निश्चित अवधि के लिए सदन से निलंबन (Suspension) जैसी दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश अपनी रिपोर्ट में कर सकती है। अंतिम फैसला राज्यसभा सभापति के विवेक पर निर्भर करेगा।
