प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की लगभग 2.5 घंटे की संक्षिप्त यात्रा भारत के लिए बेहद गेम-चेंजर साबित हुई है। मिडिल ईस्ट में जारी क्षेत्रीय संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता के बीच, इस यात्रा ने भारत की ऊर्जा और रणनीतिक सुरक्षा को एक नया सुरक्षा कवच दिया है। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई ऐतिहासिक समझौतों पर मुहर लगी, साथ ही अरबों डॉलर के निवेश की घोषणा भी की गई।

ऊर्जा सुरक्षा: LPG और पेट्रोलियम भंडार पर बड़ा करार
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए दोनों देशों ने ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार) पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) भारत के भूमिगत तेल भंडार में निवेश करने वाली एकमात्र विदेशी कंपनी है, और यह नया समझौता इस रिश्ते को और मजबूत करेगा। इसके साथ ही, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) और ADNOC के बीच तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर भी समझौता हुआ। गौरतलब है कि UAE वर्तमान में भारत की घरेलू LPG जरूरतों का लगभग 40% हिस्सा पूरा करता है।
रणनीतिक रक्षा साझेदारी और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर
यात्रा के दौरान भारत और UAE के बीच ‘स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप’ के फ्रेमवर्क पर सहमति बनी। यह समझौता केवल सैन्य अभ्यास तक सीमित नहीं होगा, बल्कि एडवांस रक्षा तकनीकों के संयुक्त विकास, खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद-रोधी सहयोग को बढ़ावा देगा। इसके अतिरिक्त, गुजरात के वाडिनार में एक “शिप रिपेयर क्लस्टर” स्थापित करने के लिए भी MoU हुआ, जिससे भारत क्षेत्रीय स्तर पर जहाजों की मरम्मत और रखरखाव का एक बड़ा केंद्र बन सकेगा।
इस संक्षिप्त दौरे में UAE ने भारत में 5 अरब डॉलर (लगभग 41 हजार करोड़ रुपये) के निवेश की घोषणा की। इस राशि का उपयोग भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, RBL बैंक की क्रेडिट क्षमता बढ़ाने और हाउसिंग फाइनेंस कंपनी ‘सम्मान कैपिटल’ में तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार पहले ही 100 अरब डॉलर के पार पहुँच चुका है, जिसे अब आने वाले वर्षों में 200 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
