ईरान में पिछले करीब तीन महीनों से जारी डिजिटल सन्नाटा आखिरकार खत्म हो गया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने देश में 85 दिनों तक चले लंबे इंटरनेट ब्लैकआउट (Internet Blackout) के बाद अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट सेवा को फिर से बहाल करने का ऐतिहासिक आदेश जारी कर दिया है। इस फैसले से ईरान के करोड़ों नागरिकों ने राहत की सांस ली है, जो इतने लंबे समय से पूरी दुनिया से पूरी तरह कट चुके थे। ईरान के संचार मंत्रालय और सरकारी मीडिया ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि राष्ट्रपति पेजेशकियान ने इंटरनेट बहाली के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह फैसला साइबर स्पेस से जुड़े देश के उच्चस्तरीय अधिकारियों की एक विशेष बैठक के बाद लिया गया।

जनवरी 2026 में सुरक्षा कारणों से लगी थी पाबंदी
आपको बता दें कि जनवरी 2026 में ईरान देशभर में उग्र विरोध प्रदर्शनों और गंभीर सुरक्षा चिंताओं से जूझ रहा था। इसी को देखते हुए ईरानी सरकार ने इंटरनेट सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। इस प्रतिबंध के कारण आम जनता की पहुंच ग्लोबल इंटरनेट से पूरी तरह खत्म हो गई थी। पूरे देश में केवल सरकार द्वारा नियंत्रित इंट्रानेट या कुछ चुनिंदा सीमित वेबसाइट्स ही काम कर रही थीं।
कारोबार और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा था बुरा असर
लगातार 85 दिनों तक इंटरनेट बंद रहने की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ा। देश में ऑनलाइन कारोबार, डिजिटल बैंकिंग, छात्रों की पढ़ाई और सामान्य संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई थी। हजारों छोटे और मध्यम स्तर के बिजनेस बंद होने की कगार पर पहुँच गए। आम लोगों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स इस्तेमाल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ब्लैकआउट के दौरान कुछ गिने-चुने लोग बेहद महंगे वीपीएन (VPN) और वैकल्पिक तकनीकों के सहारे ही जैसे-तैसे इंटरनेट का इस्तेमाल कर पा रहे थे।
अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बाद लिया फैसला
ईरान सरकार लंबे समय से इंटरनेट सेंसरशिप, सोशल मीडिया पर कड़े नियंत्रण और डिजिटल पाबंदियों को लेकर वैश्विक मंचों और मानवाधिकार संगठनों के निशाने पर रही है। मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया था कि सरकार ने इस इंटरनेट ब्लैकआउट का इस्तेमाल विरोध प्रदर्शनों को दबाने और वहां हो रही सरकारी कार्रवाई की खबरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाहर जाने से रोकने के लिए किया था। हालांकि अब राष्ट्रपति के आदेश के बाद इंटरनेट बहाली की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि पूरे देश में सामान्य इंटरनेट सेवा को पूरी तरह सुचारू होने में थोड़ा समय लग सकता है। साथ ही, आशंका यह भी जताई जा रही है कि सरकार भविष्य में भी इंटरनेट ट्रैफिक पर अपना कड़ा नियंत्रण जारी रख सकती है।
