पहले से ही आसमान छूती महंगाई की मार झेल रहे देश के आम और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आने वाले दिन और अधिक मुश्किलों भरे हो सकते हैं। देश के कई हिस्सों में मानसूनकी सुस्त रफ्तार और कमजोर बारिश ने न केवल खेती-किसानी पर संकट खड़ा किया है, बल्कि आम आदमी के घरेलू बजट पर भी चिंता के बादल मंडरा दिए हैं। आर्थिक और कृषि मामलों के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि यदि मानसून की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले हफ्तों में दूध, दालों और हरी सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

सब्जियों और दालों पर दिखेगा सबसे पहला असर
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून में देरी या कम बारिश का सबसे पहला और सीधा प्रहार हरी सब्जियों की सप्लाई चेन पर पड़ता है। पर्याप्त बारिश न होने और अत्यधिक गर्मी के कारण फसलें खेतों में ही झुलस जाती हैं, जिससे मंडियों में सब्जियों की आवक (सप्लाई) काफी घट जाती है और दाम तेजी से बढ़ जाते हैं।
इसके अलावा, जून-जुलाई का यह महीना खरीफ फसलों, विशेषकर अरहर, उड़द और मूंग जैसी मुख्य दालों की बुआई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मानसून कमजोर रहने के चलते देश में दालों के कुल बुआई क्षेत्र (Sowing Area) में बड़ी कमी आने की आशंका है, जिससे भविष्य में उत्पादन घटेगा और दालों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं।

डेयरी उद्योग पर संकट: क्यों महंगा हो जाएगा दूध?
आमतौर पर लोग मानसून का संबंध केवल अनाज और फसलों से जोड़ते हैं, लेकिन इसका एक बड़ा और सीधा असर डेयरी उद्योग पर भी पड़ता है। कमजोर बारिश के कारण देश में पशुओं के लिए हरे चारे की भारी किल्लत पैदा हो जाती है। हरा चारा कम और महंगा होने से दुधारू पशुओं के खान-पान की लागत (Input Cost) बढ़ जाती है। इसके साथ ही अत्यधिक गर्मी और कम बारिश की स्थिति में पशुओं में दूध उत्पादन की क्षमता भी काफी प्रभावित होती है। उत्पादन लागत बढ़ने के कारण डेयरी कंपनियां आने वाले दिनों में दूध और उससे बने उत्पादों जैसे घी, पनीर, छाछ और मक्खन के दाम बढ़ाने पर मजबूर हो सकती हैं।
त्योहारों से ठीक पहले खुदरा महंगाईका डर
आर्थिक विश्लेषकोंकी हालिया रिपोर्ट्स में चेतावनी दी गई है कि खाने-पीने की जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से देश की खुदरा महंगाई दर में एक बार फिर बड़ा उछाल आ सकता है। आने वाले महीनों में रक्षाबंधन, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं। ऐसे में त्योहारों के ठीक पहले खाद्य पदार्थों और डेयरी उत्पादों का महंगा होना देश के मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के त्योहारों के रंग को फीका कर सकता है और उनकी जेब पर भारी वित्तीय बोझ डालेगा।
