मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने शनिवार को कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं और गहरी हो गई हैं।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान ने बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय को निशाना बनाया। इसके साथ ही कतर के अल-उदीद एयर बेस, कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस और संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी के पास स्थित अल-धाफरा एयर बेस के आसपास धमाकों की आवाजें सुनी गईं। अबू धाबी में एक व्यक्ति की मौत की भी पुष्टि की गई है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह कार्रवाई ‘मातृभूमि की रक्षा’ के तहत की गई है और हमलावरों को उनके कदमों का परिणाम भुगतना पड़ेगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अब क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे ईरान के प्राथमिक लक्ष्य हैं।
इस घटनाक्रम के बाद कई खाड़ी देशों ने एहतियातन अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आशंका है कि यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, क्योंकि दोनों पक्षों की बयानबाजी लगातार आक्रामक होती जा रही है।

जुलाई 2024 की कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग कम से कम 51 देशों में लगभग 128 विदेशी सैन्य अड्डों का संचालन करता है। इनमें स्थायी, अर्ध-स्थायी और अस्थायी ठिकाने शामिल हैं। मिडिल ईस्ट में आठ प्रमुख स्थायी अड्डे और कई अन्य साइट्स अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अधीन आते हैं, जिनका फॉरवर्ड मुख्यालय कतर के अल-उदीद एयर बेस में स्थित है।
कतर का अल-उदीद एयर बेस क्षेत्र में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य उपस्थिति माना जाता है, जहां करीब 10 हजार सैनिक तैनात हैं। बहरीन में नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बेस अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय है, जो फारस की खाड़ी और हिंद महासागर के अहम हिस्सों की निगरानी करता है।
कुवैत में कैंप आरिफजान और अली अल-सलेम एयर बेस अमेरिकी सेना के लिए अहम लॉजिस्टिक हब हैं। संयुक्त अरब अमीरात में अल-धाफरा एयर बेस ड्रोन और टोही अभियानों का प्रमुख केंद्र है। इराक में अल-असद और एरबिल एयर बेस पर अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जहां से इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अभियान संचालित किए जाते रहे हैं।
सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर भी अमेरिकी सैन्य बल और मिसाइल रक्षा प्रणाली तैनात है। इसके अलावा जॉर्डन, सीरिया और यमन में भी सीमित अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बनी हुई है।
हालांकि इजराइल अमेरिका का करीबी साझेदार है, लेकिन वहां कोई स्थायी अमेरिकी बेस मौजूद नहीं है। दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास और रणनीतिक सहयोग के माध्यम से सुरक्षा तालमेल बनाए रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। अगर तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
