केंद्रीय बजट 2026-27 ने यह साफ कर दिया है कि सरकार की प्राथमिकता अब सिर्फ आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिक के जीवन को सीधे प्रभावित करने वाले क्षेत्रों पर फोकस बढ़ाया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए इस बजट में रोजगार सृजन, सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं, तकनीक आधारित विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने की झलक साफ दिखाई देती है।
इस बजट की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि टैक्स व्यवस्था को डर की जगह भरोसे पर आधारित बनाने की कोशिश की गई है। इनकम टैक्स कानून को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की दिशा में उठाया गया कदम मध्यम वर्ग और पेशेवरों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। सरकार का संदेश साफ है कि ईमानदार करदाताओं को अब अनावश्यक कानूनी जटिलताओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही विदेश यात्रा, पढ़ाई और इलाज से जुड़े टैक्स नियमों में ढील देकर ग्लोबल मोबिलिटी को आसान बनाया गया है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट ने एक नई उम्मीद जगाई है। कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को सस्ता करने के फैसले से लाखों परिवारों पर इलाज का बोझ कम होने की संभावना है। सरकार ने न सिर्फ नए एम्स और क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाने का ऐलान किया है, बल्कि हेल्थ सेक्टर को बड़े पैमाने पर रोजगार का जरिया बनाने की रणनीति भी पेश की है। आने वाले वर्षों में केयरगिवर्स, एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स और मेडिकल रिसर्च से जुड़े युवाओं के लिए नए अवसर खुलने वाले हैं।
अब इनकम टैक्स चोरी पर नहीं होगी जेल
अब इनकम टैक्स छिपाने या गड़बड़ी मिलने पर जेल की सजा नहीं होगी, बल्कि सिर्फ जुर्माना भरकर मामला निपटाया जा सकेगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेश यात्रा पर भी टीसीएस घटाकर 2% कर दिया है, जिससे घूमना सस्ता होगा. साथ ही, 1 अप्रैल 2026 से नया और सरल इनकम टैक्स कानून लागू होने जा रहा है. पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
अगर आप भी इनकम टैक्स के सख्त नियमों और स्क्रूटनी की प्रक्रियाओं से डरते थे, तो वित्त वर्ष 2026-27 का बजट आपके लिए राहत की बड़ी सांस लेकर आया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए साफ कर दिया है कि सरकार अब टैक्सपेयर्स पर भरोसा जताने की नीति पर काम कर रही है. सबसे बड़ी घोषणा यह है कि अब इनकम टैक्स छिपाने पर जेल की हवा नहीं खानी पड़ेगी. इसके अलावा, विदेश यात्रा से लेकर प्रॉपर्टी खरीदने तक के नियमों में आम आदमी की जेब और सहूलियत का पूरा ख्याल रखा गया है.

टैक्सपेयर्स के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि सरकार ने इनकम टैक्स कानून को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालने (Decriminalization) की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि अगर किसी करदाता की आय में गड़बड़ी पाई जाती है या टैक्स छिपाया गया है, तो अब उसे जेल की सजा नहीं होगी. ऐसे मामलों में केवल जुर्माना (Penalty) भरकर मामला रफा-दफा किया जा सकेगा. यह नया बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले ‘नए इनकम टैक्स एक्ट’ का हिस्सा होगा. सरकार का मकसद टैक्स सिस्टम को पारदर्शी बनाना है, न कि करदाताओं को डराना. साथ ही, जिनके पास विदेशों में अघोषित संपत्ति है, उन्हें भी एक मौका दिया गया है. वे अगले 6 महीनों के भीतर डिस्क्लोजर स्कीम के तहत अपनी संपत्ति की जानकारी दे सकते हैं.
विदेश यात्रा और पढ़ाई पर बड़ा फायदा
अगर आप विदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं या अपने बच्चों को पढ़ने के लिए बाहर भेजना चाहते हैं, तो यह बजट आपकी जेब पर बोझ कम करने वाला है. पहले विदेशी टूर पैकेज पर टीसीएस (TCS) की दरें काफी ऊंची थीं, जो 5% से लेकर 20% तक होती थीं. इससे बजट बिगड़ जाता था. अब सरकार ने इसे घटाकर सीधा 2% कर दिया है. चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो या फिर विदेश यात्रा का पैकेज, अब आपको केवल 2% टीसीएस देना होगा.
ITR फाइलिंग में सुधार का मौका
अक्सर ऐसा होता है कि रिटर्न भरते समय कोई जानकारी छूट जाती है. पहले इसे सुधारना एक जटिल प्रक्रिया थी. वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि अब ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ (Revised Returns) भरने के लिए करदाताओं को अतिरिक्त समय दिया जाएगा. इसके लिए बस एक नाममात्र की फीस चुकानी होगी.
समयसीमा को भी स्पष्ट कर दिया गया है. ITR-1 और ITR-2 भरने वाले करदाता 31 जुलाई तक अपना रिटर्न फाइल कर सकेंगे. वहीं, नॉन-ऑडिट बिजनेस और ट्रस्ट के लिए यह तारीख 31 अगस्त तय की गई है. इसके अलावा, छोटे करदाताओं के लिए टीडीएस सर्टिफिकेट (Lower/Nil TDS) हासिल करने की प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑटोमैटिक हो जाएगी, जिसके लिए अब अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.

एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदना हुआ आसान
अब तक अगर कोई निवासी किसी एनआरआई (NRI) से भारत में प्रॉपर्टी खरीदता था, तो टीडीएस काटने के लिए उसे ‘टैन नंबर’ (TAN) लेने की जरूरत पड़ती थी. यह एक आम खरीदार के लिए सिरदर्द जैसा था. बजट में इसे खत्म कर दिया गया है. अब प्रॉपर्टी खरीदार सीधे टीडीएस काट सकेगा और उसे अलग से टैन नंबर के लिए आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी. साथ ही, जिन निवेशकों का पैसा कई कंपनियों में लगा है, उनके लिए फॉर्म 15G और 15H की प्रक्रिया सरल कर दी गई है. अब डिपॉजिटरी इन फॉर्म्स को स्वीकार कर सीधे संबंधित कंपनियों को भेज सकेंगी, जिससे निवेशकों का काम घर बैठे हो जाएगा.
क्या हुआ सस्ता और क्या हुआ महंगा
बजट में आम जनता को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. सीमा शुल्क में बदलाव कर दवाइयों, मोबाइल, ईवी बैटरी और खेल सामान को सस्ता किया गया है, जबकि सिगरेट, विदेशी शराब, लग्जरी वस्तुएं और एफएंडओ ट्रेडिंग महंगी हो गई है.
क्या सस्ता हुआ
दवाइयां: कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 दवाओं और दुर्लभ बीमारियों की 7 दवाओं को पूरी तरह से सीमा शुल्क मुक्त (Duty-Free) कर दिया गया है. व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयातित दवाओं पर शुल्क 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है.
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स: देश में बने स्मार्टफोन और टैबलेट सस्ते हो सकते हैं क्योंकि कैमरा मॉड्यूल और डिस्प्ले पैनल जैसे कंपोनेंट्स पर शुल्क घटाया गया है. इसके अलावा, माइक्रोवेव ओवन के कुछ हिस्सों पर भी छूट दी गई है.
इलेक्ट्रिक वाहन (EV): ईवी बैटरी और लिथियम-आयन बैटरी निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) पर सीमा शुल्क कम किया गया है.
जूते और कपड़े : चमड़े के जूते और कपड़ों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए इनके कच्चे माल के आयात पर शुल्क घटाया गया है, जिससे घरेलू बाजार में भी इनकी कीमतों में राहत मिल सकती है.
खेल का सामान: ‘खेलो इंडिया’ मिशन के तहत खेल उपकरणों को अधिक किफायती बनाया गया है.
विमान यात्रा (संभावित): नागरिक विमानों के पुर्जों और रखरखाव (MRO) के लिए कच्चे माल पर सीमा शुल्क में छूट दी गई है, जिससे लंबी अवधि में विमानन क्षेत्र की लागत कम हो सकती है.
सोलर और सीएनजी: सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा को बढावा देने के लिए सोलर सिस्टम पर लगने वाले टैक्स को कम किया है, इसके साथ ही सीएनजी भी सस्ती हो सकती है.

क्या महंगा हुआ
तंबाकू उत्पाद और सिगरेट: बजट में सिगरेट और पान मसाला पर नई एक्साइज ड्यूटी और ‘सिन टैक्स’ (Sin Tax) लगाने का प्रस्ताव है, जिससे ये उत्पाद महंगे हो गए हैं.
विदेशी शराब: आयातित शराब पर लगने वाले शुल्कों में वृद्धि की गई है.
आयातित लग्जरी वस्तुएं: विदेशी परफ्यूम, महंगे जूते, कपड़े और लग्जरी घड़ियों पर आयात शुल्क बढ़ने से ये महंगे हो सकते हैं.
सोना और चांदी: कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में बदलाव के कारण घरेलू बाजार में इनके दाम बढ़ सकते हैं.
शेयर बाजार में निवेश: फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में भारी बढ़ोतरी की गई है, जिससे शेयर बाजार में ट्रेडिंग करना अब और महंगा हो जाएगा.
बायोफार्मा हब बनेगा भारत
बजट में बायोफार्मा के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का बजट जारी किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत को ग्लोबल बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर डेवलप करने के लिए अगले पांच सालों में 10,000 करोड़ रुपये के खर्च के साथ बायोफार्मा शक्ति का प्रस्ताव दिया है.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में बायोफार्मा के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का बजट जारी किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत को ग्लोबल बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर डेवलप करने के लिए अगले पांच सालों में 10,000 करोड़ रुपये के खर्च के साथ बायोफार्मा शक्ति का प्रस्ताव दिया है. वित्त मंत्री ने कहा कि नॉलेज, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के जरिए हेल्थ एडवांसमेंट के लिए बायोफार्मा स्ट्रेटेजी हेल्थकेयर में भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करेगी.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को भारत की आर्थिक ग्रोथ को तेज करने और बनाए रखने के मकसद से छह-पॉइंट का रोडमैप बताया, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, MSMEs और शहरी विकास को सरकार की रणनीति के केंद्र में रखा गया है. केंद्रीय बजट पेश करते हुए सीतारमण ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ग्रोथ के नेतृत्व वाला विकास है और उन्होंने कहा कि अपने पहले कर्तव्य के तहत, एक स्थायी आर्थिक विकास को तेज करने और बनाए रखने के लिए, मैं छह क्षेत्रों में दखल का प्रस्ताव करती हूं.

हेल्थ केयर के लिए ये हुए ऐलान
FM ने प्राइवेट सेक्टर के साथ पार्टनरशिप में 5 रीजनल मेडिकल हब के साथ राज्यों को सपोर्ट करने की स्कीम की घोषणा की. ये हब हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए अलग-अलग तरह के जॉब के मौके देंगे.
तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद
ड्रग टेस्टिंग लैब को ऊंचे स्टैंडर्ड पर अपग्रेड करना
1.5 लाख केयरगिवर्स को ट्रेनिंग देना
मेडिकल टूरिज्म हब में आयुष सेंटर होंगे
ये हुए बड़े ऐलान
बायोफार्मा के अलावा सरकार ने सेमीकंडक्टर के लिए 40 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव दिया है. साथ ही महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजाना भी लॉन्च करने का ऐलान किया है. वित्त मंत्री ने कहा कि मेगा टेक्सटाइल पार्क बनाया जाएगा.
किस योजना को मिला कितना पैसा?
बजट 2026 में गांव, गरीब और किसान पर फोकस करते हुए खजाना खोल दिया है. सबसे बड़ा बजट मनरेगा (VB-G RAM G) और मुफ्त राशन योजना को मिला है. वहीं, पीएम किसान और आयुष्मान भारत के जरिए भी आम आदमी को राहत दी गई है. जानिए, सरकारी तिजोरी से किस योजना के हिस्से में कितना पैसा आया है.
इस बजट की सबसे बड़ी हेडलाइन ग्रामीण रोजगार से जुड़ी है. सरकार ने ‘वीबी-जीराम जी’ (VB-G RAM G), जिसे हम पहले मनरेगा के रूप में जानते थे, को बजट का सबसे बड़ा हिस्सा दिया है. इसके लिए 95,692.31 करोड़ रुपये का भारी आवंटन किया गया है. अगर हम इसकी तुलना पिछले साल के मूल बजट 86,000 करोड़ रुपये से करें, तो यह एक बड़ी छलांग है.

सरकार यहीं नहीं रुकी, बल्कि मनरेगा के प्रोग्राम कंपोनेंट के लिए अलग से 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान भी रखा गया है. इसका सीधा मतलब है कि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. जो मजदूर काम की तलाश में भटकते थे या जिन परिवारों को आर्थिक सहारे की जरूरत थी, उनके लिए यह राहत की खबर है. साथ ही, इससे गांवों में छोटे स्तर पर बुनियादी ढांचे का विकास भी तेजी से हो सकेगा.
खाने की थाली की चिंता खत्म, बजट में बड़ा इंतजाम
महामारी के बाद से शुरू हुई मुफ्त राशन की व्यवस्था अब गरीब परिवारों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है. खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) पर 2,27,429 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है.
यह आंकड़ा पिछले साल के 2.03 लाख करोड़ के बजट से काफी ज्यादा है. संशोधित अनुमानों में भी खर्च बढ़ा था, लेकिन इस बार का आवंटन यह बताता है कि सरकार किसी भी कीमत पर यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश के किसी भी गरीब परिवार को राशन की दिक्कत न हो. करोड़ों परिवारों को मिलने वाला मुफ्त या सस्ता अनाज बदस्तूर जारी रहेगा.
पीएम किसान सम्मान निधि में इस बार क्या मिला?
खेती-किसानी के खर्चों से जूझ रहे छोटे और सीमांत किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan) एक बड़ा सहारा है. बजट 2026 में इस योजना के लिए 63,500 करोड़ रुपये तय किए गए हैं. यह राशि पिछले साल के बराबर ही रखी गई है.
भले ही इसमें बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन यह स्थिरता किसानों के लिए महत्वपूर्ण है. सीधे बैंक खाते में आने वाली यह मदद खाद, बीज और खेती के अन्य छोटे-मोटे खर्चों को निपटाने में बड़ी भूमिका निभाती है. सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसानों को मिलने वाली यह आर्थिक सुरक्षा बिना किसी रुकावट के चलती रहे.

आयुष्मान भारत के लिए खजाने से कितना निकला?
बीमारी का खर्च किसी भी मध्यम या गरीब परिवार की कमर तोड़ देता है. इसी चिंता को दूर करने वाली आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के लिए सरकार ने 9,500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. पिछले साल के संशोधित अनुमान (8,995 करोड़) के मुकाबले इसमें थोड़ी बढ़ोतरी की गई है. इस योजना का मकसद गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को बड़े अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा देना है.
हेल्थ सेक्टर में 250000 से ज्यादा रोजगार
बजट में स्वास्थ्य सेवाओं, प्रशिक्षण और मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई बड़े कदमों का ऐलान किया है. सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में हेल्थ और केयर सेक्टर में लाखों नए प्रोफेशनल तैयार करना है, ताकि देश में बेहतर मेडिकल सेवाएं उपलब्ध हों और युवाओं को नए करियर ऑप्शन मिलें.
बजट में सरकार ने साफ किया है कि हेल्थ सेक्टर को रोजगार का बड़ा स्रोत बनाया जाएगा. अनुमान है कि 2030 तक इस सेक्टर में 2.5 लाख से ज्यादा नए जॉब मौके तैयार होंगे. इसके लिए ट्रेनिंग, संस्थानों के अपग्रेड और नए कोर्स शुरू करने पर जोर दिया जा रहा है.
सरकार अगले पांच साल में 1 लाख एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (AHPs) तैयार करने की योजना पर काम करेगी. इसके तहत मौजूदा संस्थानों को बेहतर बनाया जाएगा और कुछ नए संस्थान भी खोले जाएंगे. जिन प्रमुख विषयों पर ध्यान दिया जाएगा उनमें ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया, ओटी टेक्नोलॉजी, एप्लाइड साइकोलॉजी और बिहेवियरल हेल्थ शामिल हैं.
केयरगिवर्स की बड़े स्तर पर ट्रेनिंग
बजट में केयर इकोसिस्टम को मजबूत करने का भी ऐलान हुआ है. सरकार का लक्ष्य मल्टी स्किल प्रोग्राम के जरिए करीब 1.5 लाख केयरगिवर्स को प्रशिक्षित करना है. ये लोग बुजुर्गों की देखभाल, वेलनेस सेवाएं, योग सहायता और एडवांस्ड मेडिकल डिवाइस के संचालन में सहयोग देंगे.
मेडिकल वैल्यू टूरिज्म को बढ़ावा
देश में मेडिकल वैल्यू टूरिज्म को बढ़ाने के लिए प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाए जाएंगे. इससे रिसर्च, इलाज और रिहैबिलिटेशन से जुड़े एक्सपर्ट के लिए नए अवसर खुलेंगे. साथ ही अंतरराष्ट्रीय मरीजों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी.
मानसिक स्वास्थ्य के लिए नया संस्थान
सरकार ने NIMHANS-2 जैसे नए मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरो साइंस संस्थान की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा है. इससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और रिसर्च को मजबूती मिलेगी.
हेल्थ प्रोफेशन को मिलेगी नई पहचान
इन कदमों से हेल्थ और केयर सेक्टर में काम करने वाले युवाओं को सिर्फ सपोर्ट स्टाफ नहीं, बल्कि प्रशिक्षित प्रोफेशनल के रूप में पहचान मिलेगी. इससे ग्लोबल हेल्थकेयर सप्लाई चेन में भारत की भूमिका भी मजबूत होगी.
चुनावी राज्यों के लिए खास ऐलान
बजट में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल जैसे राज्यों के लिए कई प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया. इन राज्यों में रेयर अर्थ डेडिकेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे. इसके अलावा 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया है, जिनका मकसद टियर-2 और टियर-3 शहरों को बड़े शहरी केंद्रों से जोड़ना और रेलवे को सड़क और कम दूरी की हवाई यात्रा के एक साफ, तेज विकल्प के तौर पर फिर से स्थापित करना है.
निर्मला सीतारमण ने बजट के दौरान कहा कि ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश में डेडिकेटेड मिनरल पार्क बनाए जाएंगे. इसके साथ ही उन्होंने वाराणसी से सिलीगुड़ी तक रेल कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा है. केरल और तमिलनाडु में रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने का भी उन्होंने बजट में प्रस्ताव रखा है.
रेयर अर्थ के लिए चीन पर भारत की निर्भरता कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि चार राज्यों – तमिलनाडु, केरल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में मिनरल्स के लिए डेडिकेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे. उन्होंने कहा, “रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट की स्कीम नवंबर 2025 में शुरू की गई थी.”
उन्होंने कहा कि अब हम ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे मिनरल से भरपूर राज्यों को माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने में मदद करने का प्रस्ताव रखते हैं.
केरल में, कोल्लम जिले के चावरा, अलाप्पुझा के तटीय क्षेत्र और तिरुवनंतपुरम के तटीय क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में रेयर अर्थ संसाधन मौजूद हैं. केंद्र की घोषणा में इन्हें परियोजना के हिस्से के रूप में शामिल किया गया है.
तमिलनाडु के आदिचनल्लूर में बनेंगे सांस्कृतिक केंद्र
निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि आदिचनल्लूर सहित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित 60 स्थलों को सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करके जनता के देखने के लिए खोला जाएगा.भारत में पर्वतारोहण पर्यटन की अच्छी संभावनाएं हैं. उन्होंने यह भी घोषणा की है कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा पश्चिमी घाट, जिनमें माउंट पोथिकाई भी शामिल है, में पर्वतारोहण गतिविधियां आयोजित की जाएंगी.
इसके साथ ही वित्त मंत्री ने घोषणा की कि तमिलनाडु के पझावेर्तकडु झील पर एक विश्व स्तरीय पक्षी अवलोकन केंद्र स्थापित किया जाएगा. उन्होंने घोषणा की है कि पक्षियों के अवलोकन के लिए वहां तीन टावर स्थापित किए जाएंगे.
वाराणसी से सिलीगुड़ी तक रेल कॉरिडोर
निर्मला सीतारमण ने बजट भारत की हाई-स्पीड रेल की महत्वाकांक्षाओं को बढ़ाने की घोषणा की. बजट में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया है, जिनका मकसद टियर-2 और टियर-3 शहरों को बड़े शहरी केंद्रों से जोड़ना और रेलवे को सड़क और कम दूरी की हवाई यात्रा के एक साफ, तेज विकल्प के तौर पर फिर से स्थापित करना है.
बजट के अनुसार पुणे-मुंबई, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, बेंगलुरु-चेन्नई, हैदराबाद-चेन्नई, दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलीगुड़ी इन रूट को ग्रोथ कनेक्टर के तौर पर डेवलप किया जाएगा और यहां रेल कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा. ये कॉरिडोर मिलकर पश्चिमी, दक्षिणी, उत्तरी और पूर्वी इलाकों को जोड़ते हैं, इंडस्ट्रियल हब, टेक्नोलॉजी सेंटर, तीर्थ शहरों और उभरते शहरी क्लस्टर को एक तेज, ज्यादा इंटीग्रेटेड नेटवर्क में लाते हैं. इसके साथ ही वित्त मंत्री ने घोषणा की कि दुर्गापुर को नॉर्थ ईस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा.
पूर्वी भारत में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट फॉर डिजाइनिंग
निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ICAI, ICSI जैसे प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशन को शॉर्ट टर्म मॉड्यूलर कोर्स डिजाइन करने में मदद करने का प्रस्ताव रखती है. उन्होंने कहा कि निजी सहयोग से 5 मेडिकल हब बनाए जाएंगे. भारत में 3 नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट फॉर आयुर्वेद बनाया जाएगा. मेडिकल टूरिज्म के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा.
उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट फॉर डिजाइनिंग बनाया जाएगा. हायर एजुकेशन में महिलाओं की भागीदारी को और बढ़ाने के लिए हर जिले में महिला हॉस्टल बनाए जाएंगे.
सेमीकंडक्टर के लिए 40,000 करोड़ का ऐलान
चीन समेत दुनिया के अन्य देशों पर सेमीकंडक्टर के लिए भारत की निर्भरता कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया है. सेमीकंडक्टर मिशन को आगे बढ़ाने के लिए बजट बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किया गया. सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 शुरू करने की घोषणा की है. इसके तहत सेमीकंडक्टर के लिए उद्योग के नेतृत्व में रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटरों पर फोकस रहेगा
सेमीकंडक्टर मिशन को आगे बढ़ाने के लिए बजट बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किया गया. ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-संपन्न राज्यों को समर्थन दिया जाएगा. राज्यों को तीन खास केमिकल पार्क स्थापित करने में मदद के लिए एक योजना शुरू की जाएगी, जिससे देश में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा.
सेमीकंडक्टर भारत के लिए बहुत जरूरी हैं क्योंकि आज की लगभग हर आधुनिक तकनीक इन्हीं पर चलती है. मोबाइल, लैपटॉप, टीवी, कार, वॉशिंग मशीन, एसी, इंटरनेट डिवाइस सब में सेमीकंडक्टर चिप्स लगती हैं. अभी भारत ज्यादातर चिप्स विदेशों से मंगाता है. अगर देश में ही चिप बनेगी तो खर्च कम होगा और सप्लाई रुकने का खतरा भी नहीं रहेगा. सेमीकंडक्टर के लिए भारत सबसे ज्यादा चीन पर निर्भर है.
मेक इन इंडिया को ताकतमेक इन इंडिया को ताकत
देश में सेमीकंडक्टर बनने से इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, ऑटो और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग तेज होगी. सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियों, रिसर्च और डिजाइन में लाखों सीधे-अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. डिफेंस, स्पेस, मिसाइल और साइबर सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाली चिप्स अगर देश में बनेंगी तो सुरक्षा मजबूत होगी. AI, 5G/6G, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डेटा सेंटर और स्मार्ट सिटी सब के लिए सेमीकंडक्टर जरूरी हैं.
- पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार
सरकार ने पर्यटन को लंबे समय तक आर्थिक विकास का मजबूत इंजन बनाने के लिए कई अहम पहलें घोषित की हैं. इस बजट में खास तौर पर मेडिकल टूरिज्म, विरासत संरक्षण और दूरदराज़ इलाकों की कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया है. दूरदराज़ और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सी-प्लेन सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा.
सरकार ने निजी क्षेत्र की भागीदारी से देश में पांच क्षेत्रीय मेडिकल टूरिज्म हब स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है. इन हब्स में अस्पताल, डायग्नोस्टिक सुविधाएं और आयुष (आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) को एक साथ जोड़ा जाएगा, ताकि विदेशों से आने वाले मरीजों को आकर्षित किया जा सके.
विरासत और सांस्कृतिक पर्यटन
सरकार 15 पुरातात्विक स्थलों को विकसित करेगी, जिनमें सारनाथ और हस्तिनापुर जैसे महत्वपूर्ण स्थल शामिल हैं. इन स्थानों को जीवंत सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. इसके साथ ही देशभर के आध्यात्मिक और विरासत से जुड़े सभी स्थलों की राष्ट्रीय स्तर पर मैपिंग और दस्तावेजीकरण की घोषणा की गई है, ताकि संरक्षण को बेहतर बनाया जा सके.
कनेक्टिविटी में सुधार
दूरदराज़ और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सी-प्लेन सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए नया सी-प्लेन वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) स्कीम लाने का प्रस्ताव है, जिससे स्वदेशी सी-प्लेन निर्माण और संचालन को प्रोत्साहन मिलेगा. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में नई माउंटेन ट्रेन सेवाएं शुरू करने की योजना है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.
शहरी और टियर-2/टियर-3 अवसंरचना
बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों, खासकर मंदिर नगरों की शहरी अवसंरचना मजबूत करने के लिए पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है. साथ ही पर्यटन और अन्य विकास कारकों के आधार पर सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER) की पहचान की जाएगी, जिनमें से प्रत्येक को पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन मिलेगा.
डिजिटल और सामाजिक समर्थन
तीन अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना और जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा केंद्र के उन्नयन की घोषणा की गई है. इसके अलावा आतिथ्य क्षेत्र में कौशल विकास और युवाओं को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हॉस्पिटैलिटी) की स्थापना की जाएगी.
देश की तस्वीर बदलने वाली घोषणाएं
वित्त मंत्री ने कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाकर 12.20 लाख करोड़ रुपए कर दिया है. हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों तक कई ऐसे ऐलान किए हैं जो देश को विकसित भारत की ओर लेकर जाएंगे.
वित्त मंत्री की ओर से किए गए प्रमुख 10 ऐलान
- कैपेक्स में इजाफा
पिछले कुछ वर्षों में सरकारी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में लगातार वृद्धि को देखते हुए, वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2027 के लिए सरकारी कैपेक्स को वित्त वर्ष 2026 के 11.2 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव रखा.
- सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
पर्यावरण के अनुकूल यात्री यात्रा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, वित्त मंत्री ने सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जोड़ने का प्रस्ताव रखा: मुंबई से पुणे, पुणे से हैदराबाद, हैदराबाद से बेंगलुरु, हैदराबाद से चेन्नई, चेन्नई से बेंगलुरु, दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी.
- बॉन्ड बाजारों को मजबूत करने के उपाय
वित्त मंत्री ने कॉर्पोरेट बॉन्ड इंडेक्स पर फंड और डेरिवेटिव तक पहुंच के साथ एक मार्केट-मेकिंग फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा. इस कदम का उद्देश्य कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूत करना है.
- निमहंस 2.0 की स्थापना
सरकार उत्तर भारत में एक प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य संस्थान स्थापित करने के लिए निमहंस 2.0 की स्थापना करेगी.
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज
बजट में मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज को 15,000 माध्यमिक विद्यालयों में कंटेंट लैब स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव है.
- विकसित भारत के लक्ष्य के लिए बैंकिंग पर विशेष ध्यान
वित्त मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह समिति संपूर्ण बैंकिंग प्रणाली की समीक्षा करेगी और भारत के आर्थिक विकास के अगले चरण को गति देने के लिए आवश्यक बदलावों का सुझाव देगी.
- NRIs की निवेश सीमा में वृद्धि
NRIs की निवेश सीमा 5% से बढ़ाकर 10% कर दी गई है और कुल निवेश सीमा 10% से बढ़ाकर 24% कर दी गई है. इस कदम से अनिवासी भारतीयों की पूंजी की भागीदारी बढ़ने और दीर्घकालिक विदेशी निधियों तक पहुंच में सुधार होने की उम्मीद है.
- राजकोषीय सुदृढ़ीकरण पर ध्यान केंद्रित
वित्त वर्ष 2027 के लिए राजकोषीय घाटे का बजट अनुमान सकल घरेलू उत्पाद का 4.3 फीसदी है, जबकि वित्त वर्ष 2026 के लिए संशोधित अनुमान 4.4 फीसदी है.
- आत्मनिर्भर भारत फंड
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को घोषणा की कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देने के लिए आत्मनिर्भर भारत कोष में 2026-27 में 4,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि डाली जाएगी। इस फंड की घोषणा 2023 में उन एमएसएमई में 50,000 करोड़ रुपए की इक्विटी फंडिंग डालने के लिए की गई थी जिनमें बड़े उद्यमों में विकसित होने की क्षमता और व्यवहार्यता है.
- एसएमई फंड का ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए अग्रणी लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपए का फंड स्थापित करने का प्रस्ताव रखा. केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए कंटेनर निर्माण हेतु एक योजना का भी प्रस्ताव रखा.
AI और नई टेक्नोलॉजी से ग्रोथ
बजट में उन्होंने AI और एडवांस टेक्नोलॉजी को मुख्य फोकस में रखा गया. AI ग्रोथ मल्टीप्लायर बनेगा और स्किल-रोजगार के नए अवसर खोलेगा. इंडिया AI मिशन और R&D फंड के जरिए टेक डेवलपमेंट को तेज किया जाएगा.
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि AI सभी लोगों को लाभान्वित करें ऐसा हमारा लक्ष्य है. इससे किसानों, महिलाओं और युवाओं को बहुत फायदा मिलने वाला है. AI की मदद से उनकी स्किल बढ़ाने पर हमारा फोकस है. उनको नए अवसर मिले इसपर सरकार काम कर रही है और इसे ध्यान में रखकर कई कदम उठाए गए हैं. जैसे कि हम इसके लिए हम नेशनल रिसर्च फंड और R&D फंड के तहत इंडिया AI मिशन चला रहे हैं. केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने अपने भाषण में कहा कि AI एप्लीकेशन सहित लेटेस्ट टेक्नोलॉजी बेहतर गवर्नेंस के लिए हमारे लिए फोर्स मल्टीप्लायर का काम कर सकती हैं.
AI से स्किल, रोजगार और ग्रोथ को मिलेगा बूस्ट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि cutting-edge technologies यानी अत्याधुनिक तकनीकें, खासकर AI, आने वाले समय में आर्थिक विकास को कई गुना बढ़ाने का काम करेंगी. सरकार का लक्ष्य है कि AI का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे, सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित न रहे. किसानों के लिए स्मार्ट एग्रीकल्चर, महिलाओं के लिए डिजिटल स्किल और युवाओं के लिए नए टेक जॉब अवसर तैयार करने पर जोर दिया गया है. AI आधारित स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम और ट्रेनिंग मॉडल को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार चाहती है कि नई टेक्नोलॉजी लोगों की उत्पादकता बढ़ाए और उन्हें बेहतर कमाई के अवसर दे.
सरकार ने AI इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए नेशनल रिसर्च फंड और R&D फंड के तहत इंडिया AI मिशन को आगे बढ़ाने की बात कही है. इसका उद्देश्य देश में रिसर्च, कंप्यूटिंग क्षमता और इनोवेशन को बढ़ावा देना है ताकि भारत टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके. बजट के साथ पेश आर्थिक सर्वेक्षण में भी कहा गया है कि भारत की AI सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कंप्यूट पावर, बिजली, टैलेंट, पूंजी और नौकरियों से जुड़ी चुनौतियों को कितनी बेहतर तरह संभालता है.
वित्त मंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि नई टेक्नोलॉजी जहां उत्पादन बढ़ाती है, वहीं पानी और ऊर्जा की मांग भी तेजी से बढ़ाती है. इसलिए टेक ग्रोथ के साथ संसाधन प्रबंधन पर भी समान ध्यान देने की जरूरत है. सरकार का फोकस अब टेक्नोलॉजी, रिसर्च और संसाधनों के संतुलित उपयोग के मॉडल पर रहेगा, ताकि विकास टिकाऊ भी हो और समावेशी भी.
सस्ती दवाएं और नए AIIMS की सौगात
सरकार ने कैंसर और शुगर की दवाएं सस्ती करने का ऐलान किया है, जिससे इलाज का खर्च काफी कम हो जाएगा. इसके अलावा, देश में 3 नए एम्स और 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब खोले जाएंगे. आयुर्वेद को बढ़ावा देने के साथ ही 1.5 लाख युवाओं को हेल्थ सेक्टर में ट्रेनिंग देने की भी घोषणा हुई है.
इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों की दौड़ लगाने वाले लोगों के लिए भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में 3 नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) बनाने की घोषणा की है. इन नए एम्स के खुलने से देश के दूर-दराज के इलाकों में भी वर्ल्ड क्लास मेडिकल सुविधाएं मिल सकेंगी.
यही नहीं, सरकार ने 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब (Regional Medical Hubs) स्थापित करने का भी फैसला किया है. इन हब्स का उद्देश्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि मेडिकल रिसर्च और ट्रेनिंग को भी बढ़ावा देना है. इन केंद्रों पर स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होंगी और ये मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा देंगे. सरकार की योजना है कि इन हब्स के जरिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जाएं.
आयुर्वेद को मिलेगी ग्लोबल पहचान
जिस तरह प्रधानमंत्री ने योग को पूरी दुनिया में एक नई पहचान दिलाई है, ठीक उसी तरह अब आयुर्वेद को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की तैयारी है. पारंपरिक दवाओं पर शोध को बढ़ावा देने के लिए गुजरात के जामनगर में एक विशेष संस्थान स्थापित किया जाएगा. सरकार का मानना है कि हमारी पुरानी चिकित्सा पद्धति में कई गंभीर रोगों का इलाज छिपा है, जिसे अब दुनिया के सामने लाया जाएगा.
रोजगार के मोर्चे पर भी हेल्थ सेक्टर में बड़ी खबर है. सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 1.5 लाख केयर गिवर्स (देखभाल करने वाले सहायकों) को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है. इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में नर्सिंग और पेशेंट केयर के क्षेत्र में युवाओं के लिए नौकरियों की बहार आने वाली है.
छोटे उद्योगों को बड़ा सपोर्ट
देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले एमएसएमई क्षेत्र के लिए बजट में बड़ा ऐलान किया गया है. बजट में जिस तरह से 10 हजार करोड़ के पैकेज का ऐलान किया गया है उससे छोटे और मझोले उद्यमों को सस्ती वित्तीय सहायता मिलेगी.
देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले एमएसएमई क्षेत्र के लिए बजट में बड़ा ऐलान किया गया है. लंबे समय से यह क्षेत्र इस बात की मांग करता रहा है कि विनिर्माण इकाइयों के लिए पूंजी की लागत कम की जाए, ताकि उत्पादन और प्रतिस्पर्धा दोनों को बढ़ावा मिल सके. बजट में जिस तरह से 10 हजार करोड़ के पैकेज का ऐलान किया गया है उससे छोटे और मझोले उद्यमों को सस्ती वित्तीय सहायता मिलेगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 202627 के लिए आम बजट पेश कर दिया है, जिसमें सरकार की आय, व्यय और नीतिगत प्राथमिकताओं का विस्तृत खाका सामने रखा गया इस बजट में लगभग सभी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए घोषणाएं की गई हैं, लेकिन विशेष रूप से देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) सेक्टर पर सरकार का फोकस साफ़ दिखाई देता है.
वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट कर्तव्य भवन में तैयार किया गया है, इसलिए इसका मूल उद्देश्य समावेशी विकास और राष्ट्रीय कर्तव्यों की पूर्ति है. बजट 2026 को तीन प्रमुख कर्तव्यों पर आधारित बताया गया है, जिनमें विकास, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा शामिल हैं. सरकार ने MSME सेक्टर को रोजगार सृजन, नवाचार और निर्यात वृद्धि का प्रमुख आधार मानते हुए कई बड़े कदम उठाए हैं. मौजूदा समय में दुनियाभर के देशों में बढ़ते तनाव और टैरिफ वॉर को देखते हुए घरेलू उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता बन गया है. बजट भाषण में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन हब के रूप में विकसित करने के लिए व्यापक सुधार किए जाएंगे.
छोटे कारोबार को मुख्यधारा में लाने में मिलेगी मदद
बजट 2026 में मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को केंद्र में रखा गया है. इसके साथ ही उन पुराने और बंद हो चुके औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित करने पर भी जोर दिया गया है, जो किसी समय रोजगार और उत्पादन का बड़ा स्रोत थीं. MSME सेक्टर में समानता और समावेशन को बढ़ावा देने से जुड़ी योजनाओं के लिए सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे छोटे उद्यमों को मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी.
हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल, 5 यूनिवर्सिटीज
शिक्षा और रोजगार से संबंधित भी कई घोषणाएं इस बजट में की गई हैं जिनमें नए संस्थान, यूनिवर्सिटीज, रोजगार और अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई है.सरकार ने देश के हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव रखा है. यानी आने वाले समय में बड़ी संख्या में नए हॉस्टल बनाए जाएंगे.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार 6 अहम सेक्टर्स के लिए खास योजना बना रही है. इनमें मैन्युफैक्चरिंग, स्ट्रैटेजिक और फ्रंटियर सेक्टर्स, हेल्थकेयर और एडवांस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र शामिल हैं. उन्होंने बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार का संकल्प साफ है कि गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों पर पूरा फोकस रखा जाएगा. यह बजट इसी सोच के साथ तैयार किया गया है.
चलिए जानते हैं इस बजट में शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में क्या-क्या खास रहा?
बजट 2026 में फार्मास्युटिकल एजुकेशन से संबंधित कई बड़े ऐलान किए गए हैं. सरकार ने देश में तीन नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर (NIPER) खोलने का प्रस्ताव रखा है. इसके साथ पहले से जो 7 संस्थान मौजूद हैं उन्हें और भी बेहतर बनाया जाएगा.
फार्मा सेक्टर में रिसर्च और इनोवेशन को मजबूत करने के लिए सरकार पूरे देश में 1000 मान्यता प्राप्त क्लीनिकल ट्रायल सेंटर्स का नेटवर्क तैयार किया जाएगा. इससे मेडिकल और रिसर्च से जुड़े युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.
प्रोफेशनल संस्थाओं जैसे आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीएमएआई को भी सरकार ने इस बजट में सपोर्ट का ऐलान किया है. इन संस्थाओं में शॉर्ट टर्म और मॉड्यूलर कोर्स तैयार किए जाएंगे जिनमें पैक्टिकल ट्रेनिंग और काम आने वाले टूल्स पर फोकस किया जाएगा. इससे टियर-2 और टियर-3 में कॉर्पोरेट मित्रों की एक मजबूत टीम तैयार होगी. इससे इन शहरों में प्रोफेशनल्स सपोर्ट और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा.
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार 20 पर्यटन स्थलों पर 10 हजार गाइडों को तैनात करेगी. इसके लिए पहले ट्रेनिंग सेंटर बनाए जाएंगे जिससे इन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों युवाओं को रोजागार मिलेगा और ट्रेनिंग सेंटर के जरिए प्रोफेशनल ट्रेनिंग भी दी जाएगी.
केंद्र सरकार बड़े इंडस्ट्रियल लॉजिस्टिक्स सेंटर्स के आसपास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाने में मदद करेगी. इन टाउनशिप में कई यूनिवर्सिटी, कॉलेज, छात्रों और स्टाफ के लिए रहने की सुविधा के साथ-साथ रिसर्च से जुड़ा पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जाएगा. इससे पढ़ाई, रिसर्च और इंडस्ट्री को एक ही जगह पर डेवलप करना है जिससे शिक्षा और रोजगार के मौके साथ-साथ हों.
देश में 15000 स्कूलों में कंटेंट क्रिएटर्स की लैब बनाई जाएगी. इसके लिए सरकार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी मुंबई को सपोर्ट करेगी.
केंद्र सरकार ने देश के हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव रखा है. यानी आने वाले समय में बड़ी संख्या में नए हॉस्टल बनाए जाएंगे. इस कदम का मकसद लड़कियों की पढ़ाई को आसान और सुरक्षित बनाना है ताकि उन्हें स्कूल, कॉलेज या दूसरे एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस में पढ़ने के लिए रहने की दिक्कत न हो.
