पश्चिम एशिया में जारी महायुद्ध अब अपने सबसे निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अंतिम चेतावनी देते हुए ’48 घंटे’ का अल्टीमेटम जारी किया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही बहाल नहीं की गई, तो अमेरिका ‘कहर’ बनकर टूटेगा। कुछ दिन पहले तक कूटनीति की बात करने वाले ट्रंप के अचानक बदले तेवरों ने पूरी दुनिया को हतप्रभ कर दिया है। 6 अप्रैल की समय सीमा जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों को लेकर हाहाकार मचने की आशंका बढ़ गई है।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आक्रामक अंदाज में लिखा कि “समय तेजी से खत्म हो रहा है।” गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर शुरू किए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के बाद से ही अमेरिका का लक्ष्य ईरान की मिसाइल शक्ति और परमाणु ठिकानों को ध्वस्त करना रहा है। हालांकि, युद्ध के पांचवें हफ्ते में ट्रंप की रणनीति विरोधाभासों से भरी नजर आ रही है। पहले उन्होंने कहा था कि इस जंग का तेल से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन अब वे सीधे तौर पर ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण और होर्मुज स्ट्रेट को सैन्य बल से खोलने की बात कर रहे हैं। यह अनिश्चितता न केवल युद्ध के मैदान में, बल्कि वैश्विक शेयर बाजारों के लिए भी चिंता का सबब बन गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ‘ऊर्जा नस’ माना जाता है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बाधित करने की धमकी और ट्रंप की 48 घंटे की चेतावनी ने संकेत दिया है कि अब केवल जुबानी जंग नहीं, बल्कि भीषण सैन्य टकराव की जमीन तैयार हो चुकी है। ईरान की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ट्रंप अपनी चेतावनी पर अमल करते हैं, तो यह क्षेत्रीय विवाद एक पूर्ण विकसित वैश्विक युद्ध में तब्दील हो सकता है। आने वाले 48 घंटे यह तय करेंगे कि दुनिया एक नए ऊर्जा संकट की ओर बढ़ेगी या कूटनीति की कोई आखिरी उम्मीद बाकी है।
