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केंद्र सरकार ने क्यों बुलाई संसद की विशेष सत्र ? विपक्ष ने इसकी टाइमिंग पर उठाए सवाल विशेष वजह?

हाल ही में संसद का मॉनसून सत्र खत्म होने के बाद भी सरकार द्वारा संसद की विशेष सत्र बुलाने और एजेंडा नहीं बताने को लेकर विपक्ष उठा रही है सवाल.

केंद्र में भाजप की मोदी सरकार ने 18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है. इस विशेष सत्र में 5 बैठकें होंगी. सरकार ने यह साफ नहीं किया कि यह सत्र किसलिए बुलाया जा रहा है. यही कारण है कि अफवाहों का बाजार गर्म हो गया कि आखिर यह सत्र क्यों बुलाया जा रहा है. अटकलें इसलिए भी हैं, क्योंकि यह चुनावी साल है. अब से तीन महीने में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं. फिर आठ महीने में लोकसभा चुनाव भी हैं. सवाल ये है कि सरकार को संसद का विशेष सत्र बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी? इस सत्र को लेकर सरकार का एजेंडा क्या है? संसद के विशेष सत्र का ऐलान करते हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, “संसद का विशेष सत्र आगामी 18 से 22 सितंबर के दौरान होगा. जिसमें पांच बैठकें होंगी. अमृतकाल के दौरान होने वाले इस सत्र में संसद में सार्थक चर्चा और बहस होने को लेकर आशान्वित हूं “

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इससे पहले संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चला था. मणिपुर हिंसा को लेकर विपक्ष के विरोध के बाद कई बार सत्र बिना कामकाज के स्थगित करना पड़ा था. इस सत्र में विपक्ष सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया, जो गिर गया.

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संसद के मॉनसून सत्र में विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा अपने तय समय में से केवल 43 प्रतिशत ही काम कर सकी. जबकि राज्यसभा में तय समय में से केवल 55 प्रतिशत ही काम कर पाई. मॉनसून सत्र में सरकार ने 23 बिल पारित कराए थे.विपक्ष के हंगामे के दौरान ही ये बिल पारित हुए थे. इनमें से दो बिल बिना चर्चा के केवल 2 मिनट में पारित कर दिए गए थे. 17वीं लोकसभा का कार्यकाल अब अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन डिप्टी स्पीकर का चुनाव अभी तक नहीं हो पाया है.

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संसद के विशेष सत्र बुलाने के ऐलान की टाइमिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं. ऐसी अटकलें हैं कि इसकी घोषणा गुरुवार (31 अगस्त) को हुई, ताकि मुंबई में विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक से ध्यान हटाया जा सके. विशेष सत्र का एजेंडा नहीं बताया गया, ताकि उसके लिए कयासों का दौर शुरू हो सके. सत्र संसद की पुरानी बिल्डिंग में शुरू हो और नए में खत्म हो. इस तरह नई संसद में कामकाज शुरू किया जा सकता है. यह संयुक्त सत्र नहीं होगा. इस दौरान अमृत काल की उपलब्धियों पर चर्चा हो सकती है. संसद के विशेष सत्र में चंद्रयान-3 मिशन की सफलता और जी-20 बैठक का सफल आयोजन पर चर्चा शामिल हो सकता है. इस दौरान महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का बिल भी लाया जा सकता है.

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